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राष्ट्र के निर्माण में शिक्षकों का योगदान सर्वोत्तम माना जाता है, गुरु शिष्य का रिश्ता होता है अटूट विश्वास का सर्वपल्ली डॉ राधाकृष्णन।

राष्ट्र के निर्माण में शिक्षक का सर्वोपरि योगदान होता है।



रिपब्लिक न्यूज।।

शहडोल - मुख्यालय जिला के शासकीय महाविद्यालय जनपद जयसिंहनगर, शहडोल ( मध्य प्रदेश) में 5 सितम्बर 2023  को गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी शिक्षक दिवस मनाया गया।

 इस पर्व पर सर्वप्रथम सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्ज्वलित किया। प्राचार्य महोदय डॉ. धर्मेंद्र कुमार द्विवेदी ने कार्यक्रम में स्वतंत्र भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन मूल्यों और उनके विचारों को बड़ी गंभीरता के साथ व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि सर्वपल्ली डॉ.राधाकृष्णन एक शिक्षक होने के साथ साथ महान दार्शनिक, समाज सुधारक,राजनैतिक चिंतक एवं आध्यात्मिक वादी विचारक भी थे। उनके ज्ञान का लोहा पूरा विश्व मानता है। भारत के राष्ट्रपति होने का गौरव भी उन्हें प्राप्त हुआ है जिसके फलस्वरूप राष्ट्र निर्माण में उनका अतुलनीय योगदान रहा है। 

कार्यक्रम में उपस्थित डॉ.लवकुश दीपेंद्र ,सहायक प्राध्यापक राजनीति शास्त्र ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि प्राचीन भारतीय गुरु परंपरा विश्व में समृद्धशाली थी किंतु आज शिक्षक बेचारे की भांति जी रहा है जीवन की मूलभूत सुविधाएं भी उसे नहीं मिल पाती हैं जिससे सम्मान के साथ साथ उचित वेतन भी नही मिल पाता है।



डॉ. यदुवीर मिश्रा ने बताया कि सर्वपल्ली राधाकृष्णन स्वामी विवेकानंद के बाद सबसे बड़े ज्ञान के स्रोत थे जिनको पूरा विश्व सलाम करता था। इसी तारतम्य में प्रो. गजेंद्र परते सहायक प्राध्यापक, अर्थशास्त्र ने भी अपने विचारों में कहा कि एक शिक्षक विद्यार्थियों की चिंताओं को,उनकी समस्याओं को क्षण भर में हर लेता है , जबरन अपने विचार या कार्य को करवाना एक अच्छे शिक्षक की श्रेणी में नहीं आता। आपने शिक्षक दिवस मनाने की यथार्थ घटना को भी बताया। कार्यक्रम में कई विद्यार्थियों ने गुरु की महिमा पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. मंगल सिंह अहिरवार,सहायक प्राध्यापक, हिंदी ने भारतीय संस्कृति में गुरु परंपरा को बताते हुए गुरु -शिष्य के बीच कई उदाहरण प्रस्तुत किए। उन्होंने आचार्य चाणक्य की शपथ को याद किया जिसने घनानंद जैसे सम्राट के संपूर्ण राज्य को विध्वंश में बदल दिया था। कार्यक्रम में उपस्थित डॉ. ममता पांडे, सहायक प्राध्यापक राजनीति शास्त्र, डॉ. राजेंद्र प्रसाद वर्मा सहायक प्राध्यापक, वनस्पति शास्त्र, डॉ. कमलेश जायसवाल, दिलीप कुमार शुक्ला, जसीम अहमद, जितेन्द्र साकेत, विवेक पाठक, के साथ महा विद्यालय परिसर में सभी विद्यार्थियों की गरिमामय उपस्थिति रही।

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