हम दो हमारे दो स्कीम को किया फेल संतान है तीन कार्यरत पंजी अभिलेख में नहीं कराए दर्ज।
इन शिक्षकों के ऐसे हैं कारनामे।
एक बीपी एक शुगर मरीज के दो शिक्षक।
शिक्षिकाओं के बहाने शिक्षक भी विद्यालय बंद करके घूम रहे बाजार।
रिपब्लिक न्यूज।।
शहडोल // मुख्यालय जिला के विकासखंडों में कई विद्यालय तीज त्यौहार के नाम पर रहे बंद।
दो दो पत्नी और तीन-तीन संतानों के कर्मचारी शासकीय कार्यालयों और विधालयों में है पदस्थ।
संबंधित विद्यालयों के शिक्षक स्वयं को नेता और नेताओं के आकर समझते हैं लेकिन अभी उनको पता नहीं नियम निर्देश और कानून व्यवस्था के सामने नेता भी घुटने टेक देते हैं कर्मचारी तो बहुत दूर की बात है।
त्रिपाठी द्विवेदी शिक्षक महोदय को समय का नहीं है परवाह प्रशासन अधिकारी और संबंधित विभाग अधिकारियों के नहीं है प्रवाह, शहडोल से पहुंच रहे 12:00 बजे बुढार फिर ढूंढ रहे जजमान जो छोड़ दे विद्यालय परिसर के पास। फिर शिक्षक महोदय का विद्यालय परिसर में होता है आराम बीपी शुगर के साथ हार्ड बीमारी का है नाम जिससे कोई ना करें इनको परेशान हम हैं नेताओं के मेहमान।
सेवा में आने के बाद अपने अभिलेखों में तीन संतान के होने का प्रमाणीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया जिससे यह प्रतीत होता है की सेवा में आने के बाद जिस प्रकार अनियमिताएं की गई है वह समझ से परे हैं।
एक शिक्षक जो होता है वह गरिमा के पद में विराजमान होता है जिसमें उनके द्वारा इस प्रकार के निवेदन की जाए कि हम दो हमारे दो स्कीम को छोड़कर हम दो हमारे तीन संतान हो ऐसी रणनीति से तीन संतान हो गए और उन तीन संतानों का विवरण अपने सेवा पंजी अभिलेखों में अंकित करवाना अति आवश्यक होता है। जिसमें संबंधित कर्मचारी के द्वारा अपने अभिलेखों में एवं विभाग को ना बता कर तीन संतान उत्पन्न होने की जानकारी प्राप्त हुई है। जो की जिला कार्यालय सहायक आयुक्त आदिम जाति कल्याण विभाग शहडोल के द्वारा सेवा में आने के बाद संतान की जानकारी अभिलेखों में दर्ज नहीं किया गया है जिसके लिए पूर्व में जारी किया जा चुका है इसके बावजूद संबंधित कर्मचारी के द्वारा मनमाने तरीके से अपने कार्यों के प्रति एवं अपने अभिलेखों के प्रति रुचि नहीं है।
शहडोल जिले में ऐसे कई शिक्षक हैं जिनके तीन संतान हैं जनपद शिक्षा केंद्र विभाग के द्वारा किसी प्रकार के कार्यवाही नहीं चल रहा है ना ही कार्यवाही हो रही है।
उपरोक्त ग्राम पंचायत में जहां शिक्षक पदस्थ हैं यह ग्राम पंचायत काफी बड़ा है और यहां पर छात्रों की भी संख्या ज्यादा है लेकिन शिक्षक पढ़ाने के प्रति नकारात्मक प्रतीत होते हैं।विकासखंड के अंतर्गत प्री प्राथमिक विद्यालय परिसर, शासकीय प्राथमिक माध्यमिक विद्यालय परिसर में पदस्थ शिक्षक महोदय कुमार के द्वारा कई प्रकार की अनियमितताएं की जाती हैं वह किसी से छुपी नहीं है जैसा कि अपने आप को बूथ लेवल ऑफिसर बताकर विद्यालय से हमेशा गायब रहते हैं।
जिससे पढ़ने वाले विद्यालय के बच्चों की स्थिति इतनी दैनि हो गई है कि प्राइमरी सेक्शन में जी के कारण अध्यापन का कार्य नहीं हो पाता है अपने आप को बूथ लेवल ऑफिसर बताकर विद्यालय से हमेशा जो गायब रहते हैं।
आपको बता दें इस विद्यालय में छात्र अत्याधिक होने के कारण अध्यापन का कार्य अति आवश्यक रूप से बढ़ जाता है जिसमें आपके द्वारा किसी प्रकार की रुचि नहीं दिखाई जाती है।
निवास स्थान के जमीन में भी है गड़बड़ झाला।
स्थानीय विशेष सूत्र अनुसार अपने आप को यह शिक्षक बताने वाले जिस प्रकार कई तरह से गलतफहमी के शिकार लोगों को बनाते हैं।
आपको बता दें जहां पर इनका निवास है वह जमीन आदिवासियों का जमीन किसी जमाने में हुआ करता था लेकिन त्रिपाठी जी ने अपनी मायाजाल इस प्रकार से बिछाई की उस जमीन में कब्जा करने के लिए सफलता प्राप्त कर ली यह सफलता में अपने आप को सफल शिक्षक मानते हैं।
जबकि मध्यप्रदेश शासन भू अधिनियम के अंतर्गत किसी भी आदिवासी जमीन को सामान्य वर्ग के व्यक्ति के नाम से रजिस्ट्री नहीं होती है इसके बाद भी इन्होंने अपने जमीन को जिस प्रकार से हथियाया है उससे प्रतीत होता है कि भ्रष्टाचार की चरम सीमा को पार करते हुए अपने आप को पाक साफ बताने में समाज के सामने प्रसिद्ध हो गए हैं।
खैर कोई बात नहीं है पहले इन सभी विषयों पर जांच हो जाएगी तो दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा।
अगले अंक में और भी कई जानकारियों का खुलासा करके सामने लाया जाएगा।
अधिकारियों के संज्ञान में रखी गई है बात छुट्टी का है दिन कार्य दिवस के दिन होगी बात।
अगले अंक में होगा प्रकाशित विद्यालयों के नाम और पदस्थ शिक्षक शिक्षिकाओं के साथ विद्यालय बंद परिसर।
जवारी, सिलपरी, अर्झूला, सिरौजा, छिरहटी, खन्नाथ, नौगवां, करकटी , सरईकापा, इन शासकीय विद्यालयों के बंद होने की कहानी शिक्षक के स्वयं होगी जुबानी संकुल प्रभारी के द्वारा दिए नोटिस के सवाल में देखते हैं क्या मिलता है जवाब।
