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कस्तूरबा छात्रावास में मेन्यू अनुसार छात्राओं को नहीं मिल पा रहा भोजन अधीक्षिका रहतीं हैं लापता।

गुणवत्ता पूर्ण मेन्यू अनुसार छात्रों को नहीं मिल रहा छात्रावास में भोजन।

विभागीय अधिकारियों के मिलीं भगत से चल रहा छात्रावास में भोजन परोसने का कारोबार। 

बीआरसी की कार्य प्रणाली के लापरवाही पर उठे सवाल।

रिपब्लिक न्यूज़।।

शहडोल मुख्यालय मध्य प्रदेश शासन के नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हुए लगभग माह बीत चुके हैं, लेकिन विकासखंड के अनेक विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को अब तक पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। 

इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और अभिभावकों में शिक्षा विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।

वहीं यह आरोप भी है कि एक ओर बीआरसी (जनपद शिक्षा केंद्र) के कार्यालय में पाठ्य पुस्तकें धूल फांक रही हैं, वहीं दूसरी ओर विद्यालयों तक उनका वितरण समय पर नहीं कराया जा सका। 

जयसिंहनगर जनपद शिक्षा केन्द्र से एक ऐसा मामला सामने आया है जहां पर संबंधित विभाग और पदस्थ कर्मचारियों के माध्यम मिली भगत से बहुचर्चित एक बालिका छात्रावास में मेन्यू अनुसार भोजन नहीं परोसने पर इस लापरवाही का खामियाजा सीधे तौर पर पढ़ने वाले छात्राओं और उनके अभिभावकों को भुगतना पड़ रहा है। इसके तत्व पर परिसर में छात्राओं का तबियत ख़राब हो जाता है और मां बाप परेशान होते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बालिका छात्रावास में कभी भी सही और मेन्यू अनुसार छात्राओं को भोजन नहीं मिलता है और संबंधित विभाग से पदस्थ अधीक्षिका परिसर से हमेशा लापता रहतीं हैं। जबकि स्थानीय विशेष सूत्रों अनुसार प्राप्त जानकारी यह भी है कि टेटका में संचालित एक बालिका छात्रावास रोड़ पर स्थित है लेकिन यहां पर कभी भी किसी प्रकार से कोई भी अधिकारी जांच करने नहीं आते हैं संबंधित विभाग की बात ही कुछ और है।

क्षेत्र में एक और जानकारी सामने आया है यहां के कई शासकीय विद्यालयों में पुस्तकें न मिलने से बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। कई छात्र अब भी पुराने नोट्स और कॉपी के सहारे पढ़ाई करने को मजबूर हैं। 

अभिभावकों ने आरोप लगाया कि संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी एवं संबंधित शिक्षकों की लापरवाही के कारण यह स्थिति उत्पन्न हो रही है।

स्थानीय और क्षेत्र के लोगों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए तथा सभी विद्यालयों में तत्काल पाठ्य पुस्तकों का वितरण सुनिश्चित कराया जाए, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले से जल्द ही शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की जाएगी। सवाल जब बीआरसी कार्यालय में पुस्तकें उपलब्ध हैं, तो विद्यालयों तक वितरण क्यों नहीं हुआ?

एक माह बाद भी छात्र-छात्राओं को किताबें न मिलने का जिम्मेदार कौन?

क्या लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर विभाग कार्रवाई करेगा?

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