आवासीय क्षेत्र में भ्रष्टाचार के ताकत से बन रही दो मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग, पड़ोसी परेशान।
रिपब्लिक न्यूज।।
शहडोल मुख्यालय जिला नगर पालिका परिषद के वार्ड नंबर 14 राजेंद्र नगर निवासी 73 वर्षीय चंद्रिका प्रसाद शुक्ल ने नगर पालिका परिषद शहडोल में आवेदन देकर उनके घर के पास आवासीय क्षेत्र वार्ड नंबर 14 में निर्मित हो रही कथित रूप से स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया को किराए में देने के लिए सार्वजनिक रास्ते पर बनाई जा रही कमर्शियल बिल्डिंग का विरोध किया है। श्री शुक्ला ने कहा है। सोहागपुर, शहडोल में स्थित खसरा नंबर 1847, 1848, 1849 को वर्ष 1963 में टाउन प्लानिंग द्वारा अनुमोदित योजना के अनुसार राजेंद्रनगर आवासीय क्षेत्र के रूप में निर्धारित किया गया था। किंतु, संबंधित इंजीनियर द्वारा नियमों का उल्लंघन करते हुए उक्त स्थल को व्यावसायिक क्षेत्र में परिवर्तित कर, कथित तौर पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को किराए पर देने हेतु निर्माण कार्य के लिए नगर पालिका द्वारा अनुमति प्रदान की गई है।
नगर पालिका परिषद को दिए गए पत्र में उन्होंने बताया कि मेरे द्वारा कराये गए सीमांकन से स्पष्ट हुआ कि करीब 1200 वर्ग फीट का रकबा भवन निर्माण करने वाले मिनान्शु मस्ता द्वारा अतिक्रमण होना पाया गया। श्री शुक्ल के अनुसार मौके पर किए गए सीमांकन पर मौके स्थल पर खसरा नंबर 1847 की मेरे घर की सीमा में पूर्व की ओर 7 फीट चौड़ा व पश्चिम की ओर 12 फीट चौड़ा जिसकी लंबाई 132 फीट भाग में अतिक्रमण होना पाया गया। इस अतिक्रमण के अंदर मिनांशु मस्ता द्वारा कराए जा रहे निर्माण पूर्व की ओर का एक कंक्रीट पिलर एवं उससे संलग्न दीवाल अतिक्रमण के अंतर्गत मौके स्थल पर है।. साथ ही राजेंद्रनगर में कालोनी वासियों के लिए आरक्षित 30 फीट चौड़ी रास्ता को भी अतिक्रमण का निर्माण कार्य किया जा रहा है। अपने पत्र के साथ मौक़ा स्थल कि टाउन प्लानिंग द्वारा अनुमोदित योजना कि छायाप्रति प्रस्तुत कर उन्होंने कहा इसके संपूर्ण दस्तावेज नगरपालिका में उपलब्ध है।
यह कार्य न केवल टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के आवासीय क्षेत्र नियमों का उल्लंघन है, बल्कि क्षेत्र के निवासियों के हितों के विरुद्ध भी है।
बताया जाता है कि मस्ता परिवार द्वारा नगर पालिका के तथा राजस्व क्षेत्र में अपनी भ्रष्टाचार की ताकत से पूर्व भी साइन मंदिर घराला मोहल्ला के पास भू अभिलेख की आराजी को किसी जैन को गैर कानूनी तरीके से भेज दिया जबकि भू अभिलेख दर्ज आर्जी जब तक नियम अनुसार परिवर्तित होकर स्वामित्व में नहीं आ जाती तब तक उसे बिक्री करना अवैध कार्यवाही माना जाता है। खबर तो यह भी है की मस्ता के द्वारा सार्वजनिक रूप से कॉलोनी में आरक्षित सड़क मार्ग में भी पूरा कब्जा कर उसे पर किन्हीं शंभू नाम के ठेकेदार की सहायता से जिसका प्रभुत्व नगर पालिका में गैर कानूनी कार्यों पर बढ़ा हुआ है के संरक्षण में इस कार्य को अंजाम दिया है।
