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विश्व हिन्दू परिषद बजरंग दल संगठन द्वारा पश्चिम बंगाल में विगत दिनों हुई सांप्रदायिक हिंसा और हिन्दू समाज पर हुए हमलों को लेकर सौंपा ज्ञापन।

बंगाल मे हिंदुओ पर अत्याचार को लेकर सौंपा गया ज्ञापन।

राष्ट्रपति शासन लगाने की किया गया मांग।


रिपब्लिक न्यूज़।।

शहडोल मुख्यालय विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल जिला संगठन के द्वारा पश्चिम बंगाल में विगत दिनों हुई सांप्रदायिक हिंसा और हिन्दू समाज पर हुए हमलों को लेकर शहडोल जिला मुख्यालय पर हिन्दू संगठनों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। विश्व हिन्दू परिषद महाकौशल प्रांत, हिन्दू एकता मंच शहडोल सहित अन्य सामाजिक व धार्मिक संगठनों ने संयुक्त रूप से राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा। 

इस दौरान जिला के सभी हिन्दू समाज के काफी संख्या मे महिलाए और पुरुष शामिल रहे।

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगानें एवं दंगों की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से करवाने और हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। कलेक्ट्रेट परिसर के मुख्य द्वार पर हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में हिन्दू समाज के लोग, कार्यकर्ता, संत-महात्मा, महिलाओं और युवाओं की भागीदारी देखी गई। बजरंग दल संगठन के सभी प्रदर्शनकारियों ने बैनर, पोस्टर और झंडे लेकर जमकर नारेबाजी की और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नीतियों को हिन्दू विरोधी करार देते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाए।

ज्ञापन में कहा गया कि पश्चिम बंगाल में एक विशेष वर्ग द्वारा हिन्दू समाज को लक्षित कर लगातार हिंसा की जा रही है। 

11 अप्रैल 2025 को वक्फ कानून के विरोध की आड़ में मुस्लिम भीड़ द्वारा मुर्शिदाबाद जिले में हिंसक प्रदर्शन किया गया, जिसमें हिन्दुओं के 200 से अधिक घरों और दुकानों को लूटकर आग के हवाले कर दिया गया। इस हमले में हिन्दू नागरिकों की निर्मम हत्या की गई, सैकड़ों लोग घायल हुए और दर्जनों महिलाओं के साथ घिनौनी हरकत हुईं। इस भयावह स्थिति के कारण 500 से अधिक हिन्दू परिवारों को अपने घर-गांव छोड़कर पलायन करना पड़ा। ज्ञापन में कहा गया कि यह हमला किसी सरकार के कानून के विरोध में नहीं बल्कि सुनियोजित रूप से हिन्दू समाज को निशाना बनाने के लिए किया गया था। हिन्दू समाज का वक्फ कानून से कोई लेना-देना नहीं था, इसके बावजूद उन्हें हिंसा का शिकार बनाया गया। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि पश्चिम बंगाल की प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह निष्क्रिय हो चुकी है। कई स्थानों पर वह दंगाइयों की मददगार या प्रेरक भूमिका में दिखाई दे रही है। ज्ञापन में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर दंगाइयों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए कहा गया कि जब हिंसा के शिकार हिन्दू शरणार्थी मदद की उम्मीद कर रहे थे, उस समय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दंगा भड़काने वाले इमामों से बैठकें कर रही थीं। एक इमाम द्वारा ममता बनर्जी को दी गई सार्वजनिक धमकी का भी उल्लेख ज्ञापन में किया गया। बजरंग दल संगठन के द्वारा आरोप लगाया गया कि अब राज्य सरकार हिन्दू शरणार्थियों को फिर से उन्हीं जिहादी तत्वों के सामने परोसने की साजिश रच रही है। 

ज्ञापन में पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था की स्थिति को पूरी तरह ध्वस्त बताते हुए कहा गया कि राज्य प्रशासन अब तृणमूल कांग्रेस के गुंडों और जिहादी तत्वों के इशारों पर काम कर रहा है। बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को न केवल राज्य में बसाया जा रहा है, बल्कि उनके दस्तावेज जैसे आधार कार्ड भी बनवाए जा रहे हैं। इसके चलते न केवल हिन्दू समाज, बल्कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा भी खतरे में पड़ चुकी है। ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए, हिंसा की जांच एनआईए से कराई जाए, राज्य की कानून व्यवस्था का संचालन केंद्रीय सुरक्षा बलों को सौंपा जाए, बांग्लादेशी और रोहिंग्या में पनप रहे घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें तत्काल निष्कासित किया जाए और भारत-बांग्लादेश की 450 किमी लंबी सीमा पर अविलंब तारबंदी कराई जाए, जिसे ममता सरकार ने रोका हुआ है। ज्ञापन में अंत में यह आग्रह किया गया कि महामहिम राष्ट्रपति इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए त्वरित एवं कठोर कार्रवाई करें, ताकि देश की अखंडता, हिन्दू समाज की सुरक्षा और भारत का संविधान सुरक्षित रह सके।

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