किसानों के साथ किसी अपराध से कम नहीं यह लापरवाही।
धान खरीदी केंद्रों पर प्रबंधकों की भारी लापरवाही से भींगे किसानों के हजारों कुंटल धान।
रिपब्लिक न्यूज।।
शहडोल मुख्यालय जिला के किसानों से समर्थन मूल्य पर धान की सरकारी खरीदी में आखिर हद दर्जे की लापरवाही ने कैसे जगह बना ली?
इस सीजन की खरीदी 2 दिसंबर से प्रारंभ हुई तो ज्यादातर केन्द्रों में 25 दिन बाद भी केंद्र से उठा कर गोदाम तक धान को लेकर उचित परिवहन और भंडारण की व्यवस्था आखिर क्यों सुनिश्चित नहीं हुई?
धान खरीदी के लिए केंद्र में प्रभारी और प्रबंधक से लेकर खरीदी एजेंसी के कर्मचारी और मॉनीटरिंग के लिए नोडल विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों को मिलाकर एक बड़ा तंत्र काम करता है। इसके बाद भी किसानों की करोड़ों रूपए की धान बारिश की भेंट चढ़ गई तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा?
क्या समय रहते जिम्मेदारों पर जवाबदेही तय होगी?
धान खरीदी में सरकारी नियम ऐसे हैं कि जब तक किसान की धान सुरक्षित गोदाम तक नहीं पहुंचेगी तब तक भुगतान नहीं होगा। अकेले शहडोल जिला में ही शनिवार सुबह से हुई बारिश में लगभग 143 करोड़ रूपए की धान भीग गई। जाहिर है इसमें किसानों का सीधा नुकसान है। इसी तरह प्रदेश के अन्य जिलों का आंकड़ा मिला दें तो किसानों के साथ हो रहे नुकसान का आंकड़ा लगभग अरबों रूपए तक पहुंच जाएगा। यह भी मान सकते हैं कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी में व्यवस्था के नाम ऐसी लापरवाही किसानों के साथ किसी अपराध से कम नहीं है। अब बड़ा सवाल यह है कि इस पूरी लापरवाही में किसानों के नुकसान की भरपाई आखिर कब तक और कैसे होगी।
प्रदेश के धान खरीदी केंद्रों पर पहुंचे किसानों के नुकसान हुए धान की भरपाई किसके जिम्मेदारी होगी क्या संबंधित विभाग द्वारा भरणी किया जाएगा नुकसान हुए धन की भरपाई।