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देश के सभी क्षेत्रों में शीत ऋतु वातावरण का तापमान कम होने से मानव स्वास्थ्य पर अनेक विपरीत प्रभाव पड़ता है, जारी हुआ एडवाइजरी।

शीतलहर से मानव जीवन के स्वास्थ्य पर पड़ता है असर।

शीत ऋतु में स्वास्थ्य सुरक्षा के संबंध में जारी की एडवाइजरी।
रिपब्लिक न्यूज।।

भोपाल // शीत ऋतु में वातावरण का तापमान अत्यधिक कम होने (शीतलहर) के कारण मानव स्वास्थ्य पर अनेक विपरीत प्रभाव पड़ता है, जैसे सर्दी, जुकाम, बुखार, निमोनिया, त्वचा रोग, फेफड़े में संक्रमण, हाइपोथर्मिया, अस्थमा, एलर्जी होने की आशंका बढ़ जाती है एवं समय पर नियंत्रण न किया जाए तो उस स्थिति में मृत्यु भी हो सकती है। उक्त प्रभावों से पूर्व बचाव हेतु समय अनुसार ठण्ड से बचने के उचित प्रबंधन आवश्यक है। यदि किसी स्थान पर एक दिन या 24 घण्टे में औसत तापमान में तेजी से गिरावट होती है एवं हवा बहुत ठंडी हो जाती है, उस स्थिति को शीत लहर कहते हैं। शीतलहर की आशंका होने पर स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के लिए रेडियो/ टीवी/ समाचार पत्र जैसे सभी मीडिया प्रकाशन का ध्यान रखें ताकि यह पता चल सके कि आगामी दिनों में शीतलहर की संभावना है या नहीं।

उन्होंने बताया कि शीत ऋतु में मौसम के परिवर्तन होने से वातावरण का तापमान कम हो जाता है, जिससे विभिन्न प्रकार के रोग जैसे सर्दी, खांसी, बुखार होने की संभावना रहती है। ऐसे वस्त्र जिनमें कपड़े की कई परतें होती है, वह शीत से बचाव हेतु अधिक प्रभावी होते हैं। आपातकालीन स्थिति होने की स्थिति में आवश्यक वस्तुओं जैसे भोजन, पानी, ईंधन, बैटरी, चार्जर, अपातकालीन प्रकाश और साधारण दवाएं तैयार रखी जाए। घर में ठंडी हवा के प्रवेश रोकने हेतु दरवाजे तथा खिड़कियों को ठीक से बंद रखा जाए। आवश्यकतानुसार बिस्तर, रजाई, कंबल, स्वेटर एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं का पूर्व से इंतजाम करें। यथासंभव कुछ अतिरिक्त गर्म कपड़ों का भी भंडारण किया जाए।

विशेषज्ञ डॉक्टरों ने बताया कि फ्लू, बुखार, नाक बहना/ भरी नाक या बंद नाक जैसी विभिन्न बीमारियों की संभावना आमतौर पर ठंड में लंबे समय तक संपर्क में रहने के कारण होती है। अतः आवश्यक होने पर ही घर से बाहर रहें। शीत से होने वाले रोग के लक्षणों के उत्पन्न होने पर तत्काल स्थानीय चिकित्सक या स्वास्थकर्मियों से परामर्श करें। यथासंभव घर के अंदर रहें और ठंडी हवा, बर्फ से संपर्क को रोकने के लिए अनिवार्य होने पर ही यात्रा करें। शरीर को सूखा रखें। शरीर की गरमाहट बनाए रखने हेतु अपने सिर, गर्दन, कान, नाक, हाथ और पैर को पर्याप्त रूप से ढकें। एक परत वाले कपड़े की जगह ढीली फिटिंग वाले परतदार हल्के कपड़े, हवारोधी/ सूती का बाहरी आवरण तथा गर्म ऊनी भीतरी कपड़े पहनें। तंग कपड़े शरीर में रक्त के बहाव को रोकते हैं, इन कपड़ों का प्रयोग न करें। शरीर की गर्मी बनाए रखने के लिए टोपी, मफलर तथा आवरणयुक्त एव जलरोधी जूतों का प्रयोग करें। सिर को ढकें, क्योंकि सिर के ऊपरी सतह से शरीर की गर्मी की हानि होती है। फेफड़े में संक्रमण से बचाव हेतु मुंह तथा नाक ढक कर रखें।

डाक्टरों बताया कि स्वास्थवर्धक गर्म भोजन का सेवन किया जाना सुनिश्चित करें।
रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि के लिए विटामिन सी से भरपूर ताजे फल व सब्जियां खाएं। गर्म तरल पदार्थ नियमित रूप से पीने से ठंड से लड़ने के लिए शरीर में गर्मी बनी रहेगी। तेल, जेली या बॉडी क्रीम से नियमित रूप से अपनी त्वचा को मॉइस्चराइज करें। बुर्जुग, नवजात शिशुओं तथा बच्चों का यथासंभव अधिक ध्यान रखें क्योंकि उन्हें शीत ऋतु का प्रभाव होने की आशंका अधिक रहती है। 
टोपी, मफलर, मोजे, स्वेटर इत्यादि का उपयोग किया जाना सुनिश्चित करें। भोजन के लिए आवश्यक सामग्री, गर्म तथा परतदार कपड़ों का भंडार करें। आवश्यकता अनुसार रूम हीटर का उपयोग कमरे के अंदर करें। रूम हीटर के प्रयोग के दौरान पर्याप्त हवा निकासी का प्रबंध रखें। कमरों को गर्म करने के लिये कोयले का प्रयोग न करें। अगर कोयले तथा लकड़ी को जलाना आवश्यक है, तो उचित चिमनी का प्रयोग करें। बंद कमरों में कोयले को जलाना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि यह कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस पैदा करती है, जो किसी भी व्यक्ति का जान ले सकती है। 

अधिक समय तक ठंड के संपर्क में न रहे।

विशेषज्ञ डॉक्टरों ने यह भी जानकारी में बताया शराब न पीएं। यह शरीर की गर्माहट को कम करता है, यह खून की नसों को पतला कर देता है, विशेषकर हाथों से, जिसमें हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ जाता है। शीत में क्षतिग्रस्त हिस्सों की मालिश न करें यह त्वचा को और नुकसान पंहुचा सकता है। शीत लहर के संपर्क में आने पर शीत से प्रभावित अंगों के लक्षणों जैसे कि संवेदन शून्यता, सफेद अथवा पीले पड़े हाथ एवं पैरों की उंगलियां, कान की लौ तथा नाक की ऊपरी सतह का ध्यान रखें। अचेतावस्था में किसी व्यक्ति को कोई तरल पदार्थ न दें। शीतलहर के अत्यधिक प्रभाव से त्वचा पीली, सख्त एवं संवेदन शून्य हो सकती है तथा लाल फफोले पड़ सकते हैं। यह एक गंभीर स्थिति होती है, जिसे गैंग्रीन भी कहा जाता है। यह अपरिवर्तनीय होती है। उन्होंने बताया कि शीतलहर के पहले लक्षण पर ही तत्काल चिकित्सक की सलाह लें। प्रभावित अंगों को तत्काल गर्म करने का प्रयास किया जाए। अत्यधिक कम तापमान वाले स्थानों पर जाने से बचें अन्यथा शरीर के कोमल अंगों में शीतदंश की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। शीत से प्रभावित अगों को गुनगुने पानी (गर्म पानी नहीं) से इलाज करें। इसका तापमान इतना रखें कि यह शरीर के अन्य हिस्से के लिए आरामदायक हों। कंपकंपी, बोलने में दिक्कत, अनिद्रा, मांसपेशियों के अकड़न, सांस लेने में दिक्कत/निश्चेतना की अवस्था हो सकती है। हाइपोथर्मिया एक खतरनाक अवस्था है, जिसमें तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता है। 
शीत लहर / हाइपोथर्मिया से प्रभावित व्यक्ति को तत्काल नजदीकी अस्पताल में चिकित्सकीय सहायता प्रदान कराएं। 
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