शासकीय शिक्षक करते है झोलाछाप डॉक्टरी इसके पहले रह चुके वकील।
शासकीय शिक्षक के कारनामे।
निजी स्वार्थ के लिए आवेदक बन कर लगा रहे सुचना का अधिकार आवेदन पत्र।
रिपब्लिक न्यूज ।।
शहडोल // मुख्यालय जिला के जनपद शिक्षा केंद्र विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी सोहागपुर क्षेत्र अंतर्गत शासकीय प्राथमिक माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ शिक्षक और शिक्षिकाओं के कारनामों की कहानी जिला के सभी क्षेत्रों में फैला हुआ है। कहीं तो शिक्षक अपने केन्द्र से लापता रहते है। कहीं तो ऐसे भी शिक्षक है जो कि एक सप्ताह में सिर्फ एक बार ही अपने पदस्थ विधालय में आते हैं।
महिला शिक्षकों की बात की जाए तो अपने पदस्थ विद्यालय में बिना डेट डालें छुट्टी का आवेदन पत्र सिर्फ दो दिन का लिखकर छोड़कर चले जाते हैं और कई दिनों तक विद्यालय से लापता रहते हैं। उसके उपरांत जब भी कभी विद्यालय आते हैं धड़ाधड़ एक साथ एक हफ्ता दो हफ्ता या पूरे पूरे महीने का दस्तखत करते हुए कर्मचारी उपस्थित पंजीयन पर अपना उपस्थिति दर्ज करते हैं।
अधिकारियों और ऊपर की पहुंच बताकर महिला होने का नाजायज फायदा भी उठा रहे हैं।
सोहागपुर जनपद शिक्षा केंद्र अंतर्गत एक ऐसा ही मामला सामने आया है एक शासकीय शिक्षक जिनकी कहानी ऐसे ही कुछ है। जगदाधर (उर्फ जेडी) कहने को तो शिक्षक के नाम पर पदस्थ हैं। लेकिन प्रस्तुत होने के साथ-साथ अपनी वकालत का रुतबा का अभी तक पावर दिखते हुए नजर आते हैं। विशेष सूत्रों अनुसार जानकारी के मुताबिक शासकीय कर्मचारी संबंधित शिक्षक ने अपने गांव में झोलाछाप डॉक्टरी कार्य करके लोगों का इलाज करने का काम करते हैं और वकालत का रौब दिखाकर विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारियों को पावर दिखने का काम करते हैं।
स्थानीय विशेष सूत्रों अनुसार प्राप्त जानकारी।
शासकीय शिक्षक शिक्षा केंद्र से लापता रहते हैं जानकारी यह भी मिली है इसके पहले विक्रमपुर ग्राम पंचायत में सदस्य थे जिसमें इनके ऊपर अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध थाना बुढार में हुआ था जिसमें इनके विरुद्ध प्रकरण चलते हुए न्यायालय द्वारा प्रकरण में निराकरण किया गया है?।
इनके कारनामे इस कदर उजागर होंगे जब इनके खिलाफ जांच प्रशासनिक दृष्टिकोण से हो इनको किसी का भय नहीं है अपने मन के मालिक है। जबकि एक शिक्षक झोलाछाप डॉक्टरी करने का कोई अधिकृत कर्मचारी नहीं हो सकता है जबकि एक शासकीय शिक्षक को अपने विद्यालय में अध्यापन कार्य करने के अलावा कोई भी कार्य नहीं करना होता है इसके बाद भी शाम समय घर-घर जाकर झोलाछाप डॉक्टर कार्य में इंजेक्शन लगाना दवाईयां देना इनका पेशा बन चुका है इनके ऐसे कई प्रूफ है। इनके द्वारा उपरोक्त कार्य संपादित किया जाता है विद्यालय की पठन-पाठन पर अपनी रुचि न दिखाकर विद्यालय और गांव की राजनीति पर अपना हस्तक्षेप जमाए रहते हैं जो की शासन के नियम अनुसार उचित नहीं है।आपको बता दें किसी के विरुद्ध यदि इन्हें सूचना अधिकार लगाना है तो किसी वकील के माध्यम से सूचना अधिकार लग वाकर परेशान करना इनके जेहन में है। और स्वयं बनकर सूचना का अधिकार आवेदन लगा देते हैं जिससे कर्मचारी भी परेशान होते हैं और स्वयं परेशान होकर लोगों को अनावश्यक सलाह देते रहते हैं।
शिक्षक अपने कर्तव्यों के प्रति अधिकार करें तो छात्राओं का हित होगा।
