मनमुटाव चरम पर, बिगड़ सकता हैं जीत का समीकरण।
जय सिंह मरावी और मनीष सिंह को मिला क्षेत्र लेकिन बदल गए विधानसभा चुनाव का क्षेत्र।
दल बदलू पुर्व विधायक का संदेश एक करोड़ नमन चढ़ौत्री सेवा भाव नहीं हुआ कामयाब।
रिपब्लिक न्यूज।।
मध्यप्रदेश शहडोल // विधानसभा क्षेत्र के विजयी सत्ता के 8 सीटों के नतीजों से तय होता है।
प्रदेश में इसको लेकर चुनावी ताना बाना बुनने में लगी है चिरपरिचित प्रतिद्वंदी भाजपा और कांग्रेस एक दूसरे को पटखनी देने का कोई मौका नहीं गवा रहे है। दोनों दलों का न केवल फोकस इन्ही 8 सीटों पर है। चुनावी जमावट की रेस में एक - दूसरे से आगे निकलने की जी - तोड़ के साथ जनसंपर्क कवायदों में जुटी हुई हैं।
इनमें चुनाव दर चुनाव कांग्रेस के लिए खुशी के कम और गम के ज्यादा मौके आए हैं। बीते चुनाव के नतीजे भाजपा के लिए एक जोर का झटका जोर से ही लगने कि तर्ज पर रहा। भाजपा से ज्यादा सीटों पर विजयी परचम फहरा कर कांग्रेस ने सत्ता की चाबी हासिल कर लिया था। लेकिन सत्ता की मलाई कांग्रेस मात्र 15 माह ही खा पाई और कुछ बिकाऊ लाल नेताओं के दलबदल के तूफान ने उसे सत्ता से बेदखल कर दिया।
एक बार फिर विधानसभा के महासंग्राम के लिए भाजपा - कांग्रेस के साथ साथ और भी कई अन्य पार्टियों का चुनावी चौसर की जमावट में दिन दूनी रात चौगुनी गति से जुटी हुई है।
मुख्यालय संभाग के जिला की बात करे तो भाजपा का गढ़ बन चुके इस जिला में गत चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा के वोट बैंक में न केवल सेंध लगाई बल्कि सीट पर विजयी परचम फहराकर एक जिले में जीत का खाता भी खोल दिया।
इस सीट पर समर्थक ने कांग्रेस के लिए विजयी द्वार खोले थे। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी मगर मात्र 15 माह बाद ही दलबदल के तूफान ने उपचुनाव करा दिया जिसमें भाजपा अंक गणित के जरिए फिर सत्ता में काबिज हो गई।
इसी तरह की कहानी की जिले में भी दोहराई गई। यहां तक विधानसभा सीट से समर्थक माने जाने वाले ने चुनाव में कांग्रेस के लिए जीत दर्ज की फिर कांग्रेस को अलविदा कह भाजपा का दामन थाम और उपचुनाव में भाजपा का विजयी परचम फहरा दिया इस तरह सियासी उठापटक के चलते शाह और मात का खेल चलता रहा।
जिला के विधानसभा सीट से गत विधानसभा चुनाव हारी समर्थक ने भी हालही में कांग्रेस को अलविदा कह दिया है। उन्होंने और भी कई ब्लाक में पार्टी द्वारा की गई ब्लाक अध्यक्षों की नियुक्ति पर ऐतराज जताकर प्रदेश संगठन से इनकी शिकायत की थी जिसमे उनकी चुनावी हार के लिए नवनियुक्तो को जिम्मेदार ठहराया गया था? उनकी मांग को अनसुना कर दिए जाने से नाराज होकर नेता ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया। इसी तरह जिले की विधानसभा के नेता दरबार ने भी कांग्रेस छोड़ दी है! जिले में जहां एक ओर जिला कांग्रेस अध्यक्ष जिले का दौरा कर कार्यकर्ताओं का बैठक लेकर संगठनिक मजबूती की कवायदे कर रहे है वही दूसरी ओर ताजा घटनाक्रम जिला कांग्रेस को झटका देने वाला साबित हो रहा है।
जिला के ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी का नाम अभी भी नहीं मिला लिस्ट में जगह। यहां से शरद कोल वर्तमान विधायक रहे हैं। बहरहाल इस सीट से प्रत्याशी घोषणा होने को लेकर क्षेत्रीय जनता को अभी और कुछ समय तक इंतजार करना पड़ेगा। लेकिन संभवतः यहां भी भाजपा का अलग अंदाज देखने को मिल सकता है। स्थानीय नेता वीरेश सिंह रिंकू जो की कुछ दिनों पहले भाजपा घर वापसी के फल स्वरुप शरद पर मायने रखते हैं।
कुछ विधायकों के कारनामे पार्टी और स्वयं पर लगाएं हैं दाग उनके विधानसभा क्षेत्र पर लग सकता है सेंध और हार सकते हैं अपना विजयी क्षेत्र।
