हम झूठे वादे नहीं करते जनता के साथ विश्वास घात करना हमारा काम नहीं।
भाजपा के कारखाने में हर रोज महिलाओं का होता है।
रिपब्लिक न्यूज।।
शहडोल मुख्यालय // कांग्रेस नेता राहुल गांधी आज मध्य प्रदेश के दौरे पर हैं। जिला शहडोल के ब्यौहारी में जनसभा को संबोधित किया हैं। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी के साथ कमलनाथ, प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला,दिग्विजय सिंह, गोविंद सिंह,अजय सिंह,जीतू पटवारी सहित प्रदेश के सभी बड़ें कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे हैं।
राहुल गांधी सतना पहुंचे और फिर वहां से शहडोल ब्यौहारी के लिए रवाना हुए ब्यौहारी में कार्यक्रम के समय जनजातीय झलक है उनकी सभा के लिए 19 एकड़ के मैदान पर लगभग लाखों स्क्वायर फीट में पंडाल लगाया गया। शहडोल में उनका दौरा विंध्य की 30 और महाकौशल की 34 सीटों को ध्यान में रखकर कार्यक्रम शहडोल जिला के व्यौहारी विधानसभा क्षेत्र में रखा गया था।
व्यौहारी विधानसभा क्षेत्र पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी का जनसभा को संबोधित करने का कार्यक्रम रहा जिसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी जमकर भाजपा की अनगिनत कमियां बताते हुए देश प्रदेश के नेताओं की कमियां गिनाते हुए कहा बीजेपी की लेबोरेटरी में नेता आदिवासियों के ऊपर पेशाब करते हैं। शब्द बहुत महत्वपूर्ण होते हैं आदिवासी शब्द का मतलब जो पहले आए थे जो इस जमीन के मालिक हैं। उनको हम आदिवासी कहते हैं मतलब ये कोई खोखला शब्द नहीं है।
इसका मतलब हिन्दुस्तान की जमीन,जल,जंगल पर आपका सबसे पहला हक बनता है।
दूसरी तरफ वनवासी का मतलब आपका इस जमीन पर हक नहीं बनता है,इसलिए बीजेपी के नेता आदिवासियों पर पेशाब करते हैं। जो जानवरों को भी खिलाया नहीं जाता वो हमारे आदिवासी समाज को खिलाया जाता है। इनका कहना है कि आपको जंगल में रहना है।
ये आदिवासी और वनवासी शब्द का फर्क है।
भाजपा सरकार ने धमकी देकर, डरा कर आपसे जमीन छीनी। जोबट, मंडला, डिंडोरी में आपने धरना दिया। कहा कि जमीन नहीं देना चाहते मगर हिंसा के साथ आपको हटाकर जो आपका हक है उसे छीना गया। मैं आपको गारंटी देता हूं जो आपका है आपको दे देंगे। जमीन जंगल का हक आपको दे देंगे।हिन्दुस्तान की सरकार को 90 अफसर चलाते हैं। केंद्र सरकार का कोई भी निर्णय हो छोटे से छोटा, बड़े से बड़ा, मनरेगा कैसे काम करेगी। ये सारे निर्णय अंत में ये 90 अफसर साइन कर के निर्णय लेते हैं। 90 अफसरों में से तीन अफसर ओबीसी वर्ग के हैं। ये जो पूरा बजट है इसमें से सिर्फ पांच परसेंट बजट ओबीसी अफसर तय करते हैं।अगर सरकार 100 रुपये खर्च करती है तो ओबीसी अफसर पांच रुपये का निर्णय लेते हैं। तो बताइए आदिवासी कितने रुपये का निर्णय लेते हैं। आदिवासी अफसर कितने रुपये का निर्णय लेते हैं। शर्म की बात है 100 रुपये में से आदिवासी अफसर पांच रुपये का निर्णय नहीं लेते। आदिवासी अफ़सर लगभग 10 पैसे का निर्णय लेता है। इससे बड़ा आदिवासी वर्ग का अपमान और क्या हो सकता है।
आदिवासियों को इस देश में कितना हक मिलना चाहिए,ओबीसी,एससी,एसटी को कितना हक मिलना चाहिए, इसलिए हमने जाति जनगणना की बात की है और हम करवा के दिखाएंगे। पहले मोदी भाषणों में वनवासी कहते थे, मैंने कहा भी है आप आदिवासियों का अपमान मत करो।
हम आपसे झूठ बोलने नहीं आए हैं। हमारे शासन काल में जाति जनगणना कराएंगे। चाहे बीजेपी नहीं कराए तो हम दबाव डालेंगे हम कराएंगे तीन राज्यों में छग, कर्नाटक, राजस्थान की सरकार ने काम शुरू कर दिया है। एमपी में सरकार आते ही हम पहला काम जाति जनगणना का काम करेंगे।हम आदिवासी वर्ग को हिन्दुस्तान की हिस्सेदारी देना चाहते हैं। पहला कदम जाति जनगणना है। मैंने कमलनाथ जी से कहा, कमलनाथ जी आपकी आयु क्या है।
