चवन्नी के चोरी के चक्कर में दुर्घटनाग्रस्त बालिका जमकर रोई।
नगर के साथ साथ क्षेत्र के लोगों ने अपनी दबी हुई बातों में कहा मुख्यालय अंतर्गत नगर के बाण गंगा तिराहे से लेकर जिला बस स्टैंड से होते हुए बुढार रोड जमुआ तक एक बार आयुक्त महोदय शहडोल द्वारा टूटें हुए सड़कों का मुआयना किया जाए।
रिपब्लिक न्यूज।
शहडोल // मुख्यालय के नगर अंतर्गत वन वृत्त कार्यालय के सामने हुआ घटना यहां पर तिराहा भी है और कुछ फीट दूर में चौराहा भी इसलिए लड़की का ध्यान तिराहा को पार करके चौराहा में जाने की तरफ लगा रहा, उसे नहीं मालूम था कि शहडोल नगर में कहीं भी बड़े गड्ढे सड़क में मिल सकते हैं उसे भ्रम था कि शहडोल नगर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का गोद लिया हुआ संभाग है और मुख्यमंत्री चौहान ने करोड़ों रुपए विज्ञापन में खर्च करके खूब प्रचार-प्रसार भी किया था। विकास पर्व के नाम पर आने वाले विधानसभा चुनाव में वोट के धंधे की दुकान के लिए प्रचार प्रसार कुछ इस प्रकार का था।
कलर्ड अखबारों में तब की बात कही गई थी कि तब सड़कें गड्ढों से भरी थी जगह-जगह टूटी थी कहीं भी कोई भी गिर सकता था यह अलग बात है की चौहान बिना चूके हुए सीधे बाणसागर हेलीकॉप्टर से आ गए थे। यह देखने कि शहडोल रीवा-अमरकंटक सड़क मार्ग की बद से बदतर हालात के कारण 56 लोग कैसे बाणसागर की नहर में बच्चे, बूढ़े जवान , लाडली बिटिया, और अब के लाडली बहने डूब कर मर गए। उन्हें आज तक यथोचित मुआवजा भी नहीं मिला ज़िंदगियां जन्म लेने से पहले सड़क के कारण डूब कर मर गयी।
प्रदेश के मुखिया जी को छोड़ देते हैं वे प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं, विंध्य प्रदेश बना नहीं है कि उसकी अपनी सरकार हो, इसलिए दूरस्थ संविधान की पांचवी अनुसूची में सूचित शहडोल क्षेत्र में सड़क में यदि कोई मरता है या दुर्घटनाग्रस्त होता है तो मुख्यमंत्री को दोषी ठहराया नहीं जाना चाहिए।वह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। विंध्य के इस अंचल में दो संभाग हैं रीवा और शहडोल। शहडोल संभाग आदिवासी विशेष संभाग है और शहडोल मुख्यालय इस विशेष संभाग का आदिवासी हितों का केंद्र स्थित मुख्यालय है।
इस प्रदेश ऐसा माना जाना चाहिए क्योंकि भारत का सबसे बड़ा आदिवासी विश्वविद्यालय अमरकंटक विश्वविद्यालय इसी संभाग का हिस्सा है ।
इसलिए शहडोल कमिश्नर के द्वारा आदेश किया गया था कि बरसात के पहले मुख्यालय अंतर्गत सभी सड़कों के गड्ढे भर दिए जाएं उन्हें मरम्मत किया जाए जिससे आम आदमी के लिए सुविधाजनक हो। किंतु शहडोल मुख्यालय में यानी नगर में ही इन गड्ढों को बढ़ने दिया गया।
शहडोल जिले के अपर कलेक्टर विकास हिमांशु के बंगले के सामने सड़क दम तोड़ रखी है विकास यहीं पर जैसे ठहर गया तो जिले के क्या हालात होंगे अनुमान लगाया जा सकता है।
बरसात आने दिया गया ताकि सड़कों के गड्ढों का विस्तार हो सके क्योंकि मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश, विंध्य क्षेत्र के शहडोल नगर को सिर्फ आदिवासी गाना गाने का साउंड बॉक्स मानते हैं। इसलिए उन्होंने इसका ध्यान नहीं दिया।
शहडोल नगर की पब्लिक अपनी मूर्खता या अपने अज्ञानता के कारण इस बार नगर पालिका परिषद में बैलेंस करके वोट दिया है। परिणाम स्वरूप भाजपा और कांग्रेस में करोड़ों रुपए का पार्षदों को खरीदने का व्यापार किया गया है।
भाजपा ने बांधवगढ़ के आदर्श पशु वनराज बाघ के क्षेत्र में जाकर शहडोल नगर की विकास की रणनीति बनाई। किंतु कुछ शिकारी भाजपा की वफादारी के नाम पर शिकार होने से मना कर दिए।
परिणाम स्वरूप राष्ट्रघाती गद्दारों के कारण नगर पालिका परिषद में दुर्घटना जनक तरीके से कांग्रेस का अध्यक्ष यानी घनश्याम जायसवाल अध्यक्ष बन गए आधुनिक खरीदी बिक्री करने वाली राजनीति प्रवीण हो चुके प्रवीण शर्मा यानी डोली का मन भाजपा से पहले ही डोल गया था। इसलिए उन्होंने कांग्रेस के वफादारी के साथ मिलकर कांग्रेस और भाजपा के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के रूप में परिषद का निर्माण कराया। ऐसे में धंधा यह था की डोली भाजपा के फंड से फंडा करेंगे और घनश्याम परिषद में मुरली बजाएंगे लेकिन बात बनी नहीं और करोड़ों रुपए के जो धंधे हुए उसी की वसूली के लाले पड़ गए हैं। इसलिए संभाग मुख्यालय के शहडोल नगर में ही गड्ढों ने सड़क पर कब्जा कर लिया।
शहडोल मुख्यालय नकमिश्नर राजीव शर्मा ने इस पर ध्यान भी दिलाया, किंतु फंड का रोना लगातार जारी रहा यह अलग बात है की करोड़ों रुपए नगर पालिका परिषद के अधीन मृत पड़ी लाइब्रेरी को खनिज फंड से सीधे दे दिया जाता है। शायद इसीलिए नगरपालिका गड्ढों को भरने में उसी प्रकार से नाकाम रही जिस प्रकार से बरसात के पहले नालियों का सफाई पूरी तरह से खत्म रहा क्योंकि परिषद को अनुभव में आया है कि शहडोल नगर टीले में है और पानी रुकता नहीं, बाढ़ तो आनी नहीं है। जो भी पानी आता है उसी से नाली साफ हो जाएगी। भगवान राम के भरोसे नालियां छोड़ दी गई और पानी हमेशा की तरह सड़कों में हल्ला मचाता हुआ मुड़ना नदी में चला जाता है। जहां से सोन नदी और गंगा जी में जाकर पवित्र होता है और सागर उसे अपना लेता है।
वेयरहाल हम बात कर रहे थे कि चवन्नी के चोरी के चक्कर में साइकिल में चलने वाली लड़की क्यों जोर जोर से रो रही थी।
हम आपको बताते हैं कि पिछले दिनों इन गड्ढों को पाटने के लिए भाजपा और कांग्रेस के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने नगर में मिलकर यह तय किया की क्यों ना सीवर लाइन जो अरबों रुपए के साथ ठेकेदार के साथ मिलकर पूरे शहर को सड़क को काट कर के खाना पूरी करते हुए सीवर लाइन डाल रहा था जिसकी भविष्य की गारंटी उसी प्रकार से नहीं है जिस प्रकार से रीवा अमरकंटक सड़क मार्ग बनने के 25 वर्ष के गारंटी के साथ बना था लेकिन जल्दी ही एकमुश्त 56 लोगों के हत्या का कारण बन गया था।
इसी तरह अरबों रुपए के सीवर लाइन याने नगर में नागरिकों की कथित तौर पर नित्य क्रियाओं और मल मूत्र एकातत्रित उसे फिल्टर कर मुड़ना नदी में बहाए जाने की योजना के भविष्य की कोई गारंटी नहीं है।
कब कहां नगर के सौंदर्यीकरण का कारण बनेगी कहा नहीं जा सकता क्योंकि इसकी पूरी योजना बंद कमरे के अंदर बनी थी तो बंद कमरे के अंदर ही कई बातें तय हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए. इसके पहले कांग्रेस के अध्यक्ष ने सीवर लाइन वालों को कहा हमारे मन मुताबिक या गुणवत्ता के पूर्ण काम होना चाहिए बात जम गई गुणवत्ता को बंद करने में करोड़ों रुपए कलेक्शन करने के हिसाब से ठीक कर दिया गया।
विशेष सूत्रों अनुसार प्राप्त जानकारी।
शहडोल नगर पालिका में अब नतीजा यह था कि चुनाव में जो पैसा खर्च हुआ है वह तो वसूल हो जाएगा, सवाल यह है कि रनिंग का क्या यह कैसे चलेगा कमिश्नर साहब ने डंडा भी डाल रखा था। कि सड़क की मरम्मत करो तो तय हुआ जैसा कि सूत्र बताते हैं कि जब सीवर लाइन वाले अपनी सड़क काटकर उसकी फीलिंग में गुणवत्तापूर्ण तरीके से ही सही तैयार हो गए हैं तो जो सड़कें हैं जिनमें गड्ढे हैं उनको भी आफ दा रिकॉर्ड यही लोग कल्याणकारी कार्यक्रम के तहत कर डालें पालिका परिषद का अपना फंड पार्टी-फंड के काम भी आ सकता है। और नतीजा यह हुआ सीवर लाइन वाले भी खुश और अध्यक्ष उपाध्यक्ष भी खुश क्योंकि इन गड्ढों में चवन्नी की चोरी की संभावना जागृत हो गई छोटे गड्ढे में छोटी चवन्नी बड़े गड्ढों में बड़ी चवन्नी और शहडोल नगर में मुख्य गांधी चौक में जहां हर बरसात में बाढ़ आती है।
गांधी जी को प्रणाम करते हुए नगर पालिका परिषद ने हरी झंडी दिखा दी चार चवन्नी चांदी की, जय हो महात्मा गांधी की इस पुराने और चर्चित नारे में उन्हें बड़ा दम दिखा।
नगरपालिका क्षेत्र में गड्ढे भरे जाने लगे जो गड्ढे पहले झांकते रहते थे और नागरिकों को मुंह चिड़ाते थे उससे नागरिक भी उनके साथ प्रतियोगिता का खेल खेलते हुए उन्हें भी यानी गड्ढों को भी मुंह चिढ़ा कर उत्पाद कर चले जाते थे।
जब यह भ्रम पैदा हो गया कि गड्ढे भरे जा रहे हैं तो लाडली बिटिया कम से कम यह सोचकर के अंधेरे में अब वन वृत्त कार्यालय सी एफ ऑफिस के सामने आराम से साइकिल में चली जा रही थी अचानक एक गड्ढा उसके ऊपर कूद पड़ा, और वह साइकिल समेत गिर पड़ी और जोर जोर से रोने लगी पहले दर्द को बर्दाश्त करती रही हमारी नजर तब पड़ी जब वह जोर जोर से रोने लगी हमने समझना चाहा कि आखिर मामला हुआ क्या? क्या किसी ने बदतमीजी की है ?
लेकिन इस बात पर पता चला कि नहीं किसी ने बदतमीजी नहीं की बल्कि नगर पालिका परिषद के लोगों ने "चवन्नी की चोरी के चक्कर में जो काम सीवर लाइन वालों को सौंपा वह अंदर गलियों में तो यह खानापूर्ति करने में लग गए हैं, किंतु मुख्य मार्ग में कहीं कोई देख ना ले कहीं कमिश्नर यहां से निकल ना जाए कि क्या गड्ढे भरे गए हैं। और गुणवत्ता हीन कार्य पकड़ में आ जाएगा। इसलिए यह गड्ढे नहीं भरा गया था। जंगल विभाग का मुख्यालय के सामने जंगल समाज के लोग आखिर जंगली हैं, उन्हें क्या मतलब कि उनके कार्यालय के सामने बड़ा गड्ढा है वह तो जंगल में जाकर गड्ढा खोदते हैं और फिर भरते हैं और फिर खोदते हैं और वह भी कागजों में ऐसे में अपने कार्यालय के सामने रा मटेरियल कहां से लाएंगे? क्योंकि कल्याणकारी कोई भी कार्य के हाथ में नहीं है और ना वह सोचते हैं आदिवासी विशेष क्षेत्र है लूट सके तो लूट अन्यथा संभाग मुख्यालय का बड़ा अधिकारी और वह घर में जो खर्च करता है वह अपनी जेब से भी चाहता तो गड्ढा भरवा देत और लाडली बिटिया जोर-जोर से नहीं रोती।
लेकिन किसे चिंता है शहडोल नगर में क्या हो रहा है? कैसे तालाब, नदी और कुएं बर्बाद हो गए हैं जहां पानी कुछ देर तो ठहर सकता था, उन्हें इन गड्ढों में खानापूर्ति के लिए भरे गए तत्कालिक व्यवस्था को खत्म करने के लिए सड़कों में नहीं आना पड़ता।
लेकिन दुर्भाग्य संभाग मुख्यालय मुख्यमंत्री की गोद में बैठ कर यह सब महसूस नहीं कर पा रहा है और उसे फीलगुड में सुख का अनुभव करने के लिए छोड़ दिया गया है।
इसीलिए शहडोल की लाडली जोर जोर से रो रही थी और यह रोना सिर्फ चवन्नी की चोरी के चक्कर में नेताओं की निकम्मी पन का नतीजा रहा इसे हम पर्यायवाची में लोकप्रिय भ्रष्टाचार या राजनीति की उच्च गुणवत्ता जिसमें करोड़ों अरबों की चोरी होती है यह भी कह सकते हैं। किंतु हम आदिवासी क्षेत्र के लोग हैं हमें हमारी विलुप्त हो चुकी चवन्नी ही नजर में आती हैं इसलिए हमने माना चवन्नी की चोरी के चक्कर में शहडोल की बालिका ने जोर-जोर से रोया और कोई बात नहीं है।
यही हमारा भाग्य है ,क्योंकि हम मुख्यमंत्री की गोद में बैठे हैं.. ऐसी ही झूठी गारंटी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के जिला तोड़ो अभियान से पैदा हुए दर्द में मरहम लगाते हुए कहा था याने जुमला दिया था हम उसे गारंटी मान बैठे? क्योंकि हम आदिवासी क्षेत्र के निवासी हैं।
