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करोड़ों रुपए कीमत की मुर्गी पॉलिथीन शेड के नीचे ही खप गई।

 


शहडोल  आदिवासी बहुमूल्य क्षेत्रों में विकास के लिए जिले के आदिवासी हितग्राहियों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए जिले के अंतिम छोर पर आदिवासी हितग्राहियों को शासन के तरफ से एक करोड़ 34 लाख रुपए की मुर्गी और मुर्गी पालन के लिए शेड निर्माण करना था जिससे आदिवासी क्षेत्रों पर रोज़गार के नए स्रोत उपलब्ध कराया जा सके । लेकिन मुर्गी के बच्चे उपलब्ध नहीं हुए आदिवासी हितग्राहियों को और शेड के नाम पर पॉलिथीन लगाकर शेड एक ही गांव में कई निर्माण किया गया जबकि अधिकतम एक गांव में एक ही मुर्गी पालन शेड निर्माण करना था।

 संबंधित अधिकारियों कि मिलीभगत से करोड़ों रुपए का फर्जी भुगतान।

जिले के विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से भोपाल के किसी कम्पनी को ठेका देकर सभी आदिवासी क्षेत्रों पर एक ग्राम पंचायत के एक ही गांव में कई पालीथिन शेड का निर्माण कर मुर्गी पालन का कार्य शुरू किया गया। कम्पनी के मालिक द्वारा एक ही गांव में एक के जगह कई मुर्गी पालन करने के लिए शेड का निर्माण कराया गया। जिस पर लगभग 1 करोड़ 34 लाख रुपए का मुर्गी पॉलिथीन शेड के नीचे ही खप गई।

 इतने बड़े घोटाले का संबंधित विभाग के अधिकारियों ने नहीं लिया आज तक किसी भी प्रकार से जानकारी और आदिवासी हितग्राहियों के नाम से लगभग 1 करोड़ 34 लाख रुपए का किया घोटाला। 

विभागीय अधिकारियों को नहीं है किसी प्रकार से जानकारी।

विभाग के  मुखिया ने आज तक नहीं किया किसी प्रकार से जांच और आदिवासी हितग्राहियों को नहीं मिला किसी प्रकार का लाभ भोपाल कम्पनी के ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत से एक करोड़ 34 लाख रुपए की मुर्गी पॉलिथीन शेड के नीचे ही कब हो गई गायब। कौन है जिम्मेदार संबंधित विभाग के अधिकारी या निर्माण करता कम्पनी किसके आदेश अनुसार एक गांव में एक के जगह पर कई पालीथिन शेड का निर्माण कर मुर्गी पालन के नाम पर लीपापोती कर करोड़ों रुपए का फर्जी भुगतान किया गया है।

विशेष विभागीय सूत्रों अनुसार प्राप्त जानकारी अभी तक मामला जिले के एक ही क्षेत्र का, खुलासा हुआ है। अगले अंक में प्रकाशित होगा करोड़ों रुपए के फर्जी भुगतान का कहा, कहा कितने लोगों के नाम से मुर्गी पालन करने के लिए शेड का निर्माण कराया गया है।

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