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प्रदेश के विकास में ग्रामीण उपयंत्रीओ का 20%से 30%का खेल।

 भोपाल प्रदेश के मुखिया ने प्रदेश को सूधारने के लिए योजनाओं कि गंगा बहा रहे हैं। 


रिपब्लिक न्यूज लाइव।

विकास कार्यों कि बात किया जाए तो प्रदेश के सभी जिले अंतर्गत जनपद विकास खंड क्षेत्रों के ग्राम पंचायतों में महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना और अभी कुछ बर्ष पहले 15 बित् कि राशि भी भ्रष्टाचार की गारंटी बन गई है । ग्राम पंचायतों में इस योजना के क्रियान्वयन की देखरेख करने वाले क्षेत्र के कई रोजगार सहायक है। जो की  शुरुआत में पैदल सफर किया करते थे लेकिन वह आज लखपति बन गए हैं ।

विशेष विभागीय सूत्रों अनुसार प्राप्त जानकारी।

ग्रामीण उपयंत्री बनें ठेकेदार सचिव और रोजगार सहायक सप्लायर ।

ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों के लिए शासन के द्वारा उपलब्ध राशियों का जब से ऑनलाइन पेमेंट होना शुरू हुआ जब से कई ग्रामीण उपयंत्री ठेकेदार बन गए और सचिव ग्राम पंचायत रोजगार सहायक के द्वारा मैटेरियल सप्लायर की ठेकेदारी किया जा रहा है जो ग्रामीण उपयंत्री हैं वह अपने बेटे बहू या अपने पत्नी के नाम से फर्म चला रहे हैं ज्यादा हुआ तो अपने भाई या और किसी संबंधित रिश्तेदार के नाम से ठेकेदारी का फर्म चला रहे हैं । ग्राम पंचायतों में वही रोजगार सहायक और सचिव के मिलीभगत से भाई भतीजा पत्नी या बेटा के नाम से मैटेरियल सप्लायर का धंधा बखूबी तौर पर चलाया जा रहा है। संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से ग्राम पंचायतों में एडवांस राशि निकालकर आधा अधूरे कार्य को कागजों पर पूर्ण बता कर उस राशि का भी गबन कर लिया जा रहा है।

 मुख्य कार्यपालन अधिकारी संबंधित जनपद पंचायत सहायक उपयंत्री ग्रामीण उपयंत्री और सचिव रोजगार सहायक की मिलीभगत से उस राशि का भी गबन कर लिया जाता है। जिसका किसी भी प्रकार से कोई कार्य नहीं हुआ होता है।

जबकि वर्तमान समय में₹50000 के पेमेंट अधिकारी ठेकेदार बन जाते हैं और ग्राम पंचायत सचिव लगभग ₹30000 के वेतन से और रोजगार सहायकों का वेतन 10000 रूपए प्रति माह के लगभग है वहभी मैटेरियल सप्लायर बन जाते हैं। मनरेगा में उपयंत्री , सहायक यंत्री और पंचायत सचिव के द्वारा भुगतान के मस्टररोल का सत्यापन और एमबी में सत्यापन कराए बिना क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में रोजगार सहायकों ने कार्य की ऑनलाइन एंट्री करके भुगतान भी कर दिया करते है । दूसरी ओर लगातार खुलासों के बाद पंचायती राज के जिम्मेदार अधिकारियों ने जांच के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति करके चुप्पी साध लेते है । जिम्मेदार इस संबंध में कुछ भी बताने या बयान देने से बच रहे होते हैं ।

महिला कर्मचारी होने का नाजायज फायदा एफआईआर दर्ज करवा दूंगी मेरे से बात किए।

 जिले के कुछ कार्यालयों पर महिला कर्मचारी होने का नाजायज फायदा उठाते नजर आते हैं उनके मनमानी कार्य पर किए जा रहे भ्रष्टाचार को किसी प्रकार से कोई जानकारी मांगी जाती है तो महिला अधिकारी तुरंत भड़क कर कार्यालय से बाहर जाओ कैसे अंदर आ गए महिला कर्मचारी से इस तरह बात करते हो कई प्रकार के ब्लेम के साथ अवैध तरीके से सामने आ कर बात किया जाता है। वहीं ग्राम पंचायतों में कुछ महिला ग्रामीण उपयंत्री जो अपने महिला होने का नाजायज फायदा उठाते हुए मनचाहा प्रेसेंट की बात करते हैं और नाजायज तरीके से किए गए कार्यों का भुगतान भी करवाते हैं। इनमें कुछ महिला ग्रामीण उपयंत्री अपने पति या संबंधित रिश्तेदार के नाम से भी ठेकेदारी का फर्म चलाते देखे जा सकते हैं।

रोजगार गारंटी योजना के प्रावधानों के अनुसार किसी भी ग्राम पंचायत में जब कार्य शुरू होता है तो कार्य का मास्टर रोजगार सहायक ही भरता है । साथ ही पशु शेड , नंदन फलो उधान , कपिलधारा कूप का निर्माण कर मूल्यांकन करने की जिम्मेदारी भी रोजगार सहायक का ही होता है । मस्टर रोल तैयार हो जाने के बाद उस मास्टर रोल  पर पंचायत सचिव का प्रमाणीकरण कराना अनिवार्य होता है। और साथ ही कराए गए कार्यों का जो मूल्यांकन होता है उसे भी पंचायत सचिव सब इंजीनियर और सहायक यंत्री के द्वारा सभी मेजरमेंट बुक में प्रमाणित करके उन सबकी  ऑनलाइन एंट्री कराना अनिवार्य होता है । उसके बाद ही संबंधित मजदूरों के खातों में मजदूरी के भुगतान की राशि जमा की जाती है । किंतु क्षेत्र की अधिकांश पंचायतों में इस नियम का पालन नहीं किया जाता है । 

मनरेगा के तहत बनाए गए 1600 पशु शेड में जमकर भ्रष्टाचार किया गया है और उसका मूल्यांकन रोजगार सहायकों ने मनमाने तरीके से करते हुए जमकर मनमानियां किए हुऐ हैं।

सी एम हेल्पलाइन भी बना दिखावा।

 सी एम हेल्पलाइन की बात किया जाए तो सभी संबंधित विभागों के अधिकारी कार्यवाही के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति कर कुंडली मारकर बैठे हैं और संबंधित विभाग के अधिकारी कर्मचारी को अपने कार्यालय में बुलाकर मामला को रफा-दफा कर अपना प्रेसेंट लेकर गलत जानकारियां भेज दिया जा रहा है।

अगले अंक में प्रकाशित होगा शहडोल जिले में करोड़ों रुपए के फर्जी भुगतान की जानकारी किस विभाग के कार्यालय से किस कार्य के लिए किस अधिकारी की मिली भगत से किया गया फर्जी भुगतान। साथ में उन महिलाओं और कर्मचारियों के नाम जिन्होंने ने ग्राम पंचायतों में एडवांस राशि निकालकर कागजों पर किया खानापूर्ति। ग्राम पंचायत के भुगतान शिक्षा विभाग में किया गया भुगतान महिला बाल विकास विभाग शासकीय अस्पतालों में कराएं गए भुगतान पीएचई विभाग के द्वारा पेयजल व्यवस्था योजना में हुआ बिना कार्य जांच के भुगतान।

पुलिस हाउसिंग बोर्ड के द्वारा किया जा रहा निर्माण देखना है तो  8120005093 से प्राप्त जानकारी लेकर जाएं किस कम्पनी और पहले से यूज लोहे का रॉड से हो रहा निर्माण का खेल ठेकेदार कम्पनी और संबंधित विभाग के अधिकारियों की मिली भगत से कैसे किया जा रहा निर्माण कार्य।

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