जांच कमेटी बनने के बाद समीक्षा मे पहुंचे पांडे। सिंह और अंसारी से की मुलाकात।
जांच कमेटी के तरीके पर उठा रहा सवाल...? क्या निष्पक्ष हो सकेगा जांच।
शहडोल। प्रभारी मंत्री श्रीराम खिलावन पटेल ने जयसिंह नगर क्षेत्र के अनुदान प्राप्त शिक्षण संस्था पांडे शिक्षा समिति को करोड़ों रुपए के अनियमित पांचवें वेतनमान एरियर भुगतान के मामले में आदिवासी विभाग के भ्रष्टाचार की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया है जिले के उच्च अधिकारियों का। सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग शहडोल और जिला कोषालय अधिकारी की मिलीभगत से एक तृतीय वर्ग कर्मचारी एमएस अंसारी के द्वारा प्रभारी सहायक आयुक्त बनकर अनाधिकृत तरीके से की गई करीब 8 करोड़ 32 लाख 91 हजार रुपए की राशि का अवैध आहरण भुगतान की जांच के लिए। शिकायतकर्ता शत्रुघ्न पटेल के प्रस्ताव पर बनाई गई कमेटी में आईएएस अधिकारी अर्पित वर्मा से लेकर शिक्षक तक शामिल किए गए हैं।
बहु प्रचारित पत्र में प्रदर्शित किया गया है की अर्पित वर्मा अपर कलेक्टर, रणजीत सिंह सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग, सोहागपुर विकास खण्ड बी ई ओ एसपीएस चंदेल, प्राचार्य मनोज तिवारी, एपीसी डॉक्टर जितेंद्र कुमार पटेल का नाम प्रदर्शित किया गया है। स्पष्ट तौर पर हल्ला कि यह प्रदर्शित नहीं है की जांच की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है और जांच कमेटी जब कभी जांच करेंगी। लेकिन जब पत्र के सार्वजनिक हो जाने के बाद ही पांडे शिक्षा समिति के कर्ता-धर्ता एसपी पांडे भी इस बहुचर्चित भ्रष्टाचार के समीक्षा बैठक के लिए सहायक आयुक्त कार्यालय पहुंचे। और तृतीय वर्ग कर्मचारी एमएस अंसारी और सहपाठी अधिकारी के साथ बैठकर समीक्षा की ताकि इस भ्रष्टाचार को कैसे लीपापोती की जा सके।
जानकार सूत्र बताते हैं की अंसारी और पांडे की बैठक में यह निष्कर्ष लिया गया की सहायक आयुक्त और जिला कोषालय अधिकारी स्तर पर गैर कानूनी आहरण की जांच के लिए कोई निचले स्तर का कर्मचारी बी ई ओ, एपीसी अथवा प्राचार्य कैसे जांच कर सकता है...? और इसी एंगल पर आपत्ति जतानी चाहिए। लंबे समय तक सहायक आयुक्त कार्यालय में अंसारी और पांडे मिलकर बैठक करते देखे गए। सूत्र बताते हैं। मंत्री जी के पत्र में प्रस्तावित पांच कमेटी जांच समिति सदस्यों में अर्पित वर्मा अपर कलेक्टर और सहायक आयुक्त रणजीत सिंह को छोड़ तीन अन्य सदस्यों पर आपत्ति की जाएगी किंतु आपत्ति करता कौन होगा यह बात स्पष्ट नहीं है। तो देखने लायक होगा कि क्या भ्रष्टाचार करने वाले लोग ही तय करेंगे कि उनकी जांच कौन करेगा। किंतु यह तर्क भी जायज है कि क्या शिकायतकर्ता शत्रुघ्न पटेल ही प्रभारी मंत्री पटेल की संरक्षण में अपनी मनपसंद जांच कमेटी बनवा सकता है अथवा यह अधिकार कलेक्टर को होना चाहिए। ऐसे में इस प्रकार की जांच पहली नजर में ही विवादित होती नजर आ रही है अथवा जानबूझकर ऐसी कमजोर कमेटी बनाई गई है जिससे मामले को रफा-दफा किया जा सके...? बावजूद इसके आईएएस अधिकारी श्री अर्पित वर्मा अगर इस जांच का नेतृत्व करते हैं तो इस पर सहज लीपापोती हो जाए यह भी असंभव दिखता है...। जबकि एक अन्य सूत्र बताते हैं पांडे शिक्षा समिति की ओर से प्रोफेसर एसपी पांडे जांच समिति के चाहने पर शिक्षा समिति के दस्तावेज लेकर कार्यालय पहुंचे थे। ऐसे में भी यह प्रश्न उठता है कि क्या जांच अवैध निकासी पर हो रही है या फिर शिक्षा समिति को किए गए अवैध भुगतान के वैधता पर मोहर लगाया जा सकता है।
क्या प्रभारी मंत्री कार्यरत कर्मचारियों के पांचवें वेतन मान एरियर्स राशि का भुगतान गरीब शिक्षकों को दिलवा पाएंगे। या भ्रष्टाचार अधिकारियों के ऊपर कार्यवाही होगी।
विशेष विभागीय सूत्रों के अनुसार कलेक्टर कार्यालय में लगभग 3 घंटा खड़ी रही पांडे शिक्षा समिति के संचालक शिव प्रसाद पांडे की गाड़ी और पूर्व सहायक आयुक्त एमएस अंसारी जिला कोषालय अधिकारी राम मिलन सिंह भूषण बाबू और महोबिया के बीच लगभग 3 घंटे तक होता रहा चर्चा गाड़ी से निकाली गई सूटकेस कार्यालय से वापस नहीं आई क्या है मामला क्या जांच अधिकारी।