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अपने उच्च कोटि कार्य में प्रभारी मंत्री से सम्मानित हुऐ अधिकारी

 


शहडोल मुख्यालय गणतंत्र दिवस समारोह  कार्य क्रम में सम्मानित हुऐ मैनेजमेंट अधिकारी इस क्षेत्र का हमेशा से बड़ा दुर्भाग्य रहा है । कि ईमानदारी से और बिना किसी राजनैतिक दबाव के काम करने वाले अधिकारी, कर्मचारी ज्यादा दिनों तक नहीं रह पाते। अधिकांशतः देखा यही गया है कि जो भी अधिकारी अपने निजी स्वार्थ के आगे किसी भी शासकीय कर्तव्य को शून्य मानता है, जो केवल कुर्सी की चाहत में नेताओं और अफसरों के चापलूसी और पाखंड करता है, राजनैतिक प्रभाव में रहकर कार्य करता है । वो अपने पद एवं कुर्सी में लम्बे समय तक टिका रहता है। उसके साथ पूरी कौम खड़ी हो जाती है । किन्तु जो अपने कर्तव्य को ही सर्व समझता है उसे लोगो की नाराजगी का सामना करना पड़ता है।

करोड़ों के आरोपी अंसारी को  मंत्री जी के हाथों नहीं मिला सम्मान पत्र

लेकिन  पारदर्शी-भ्रष्टाचार को मिलता सम्मान....?

केंद्रीय शासन  ने कोरोना के कार्यकाल में नया नारा दिया आपदा ही अवसर है और उसका क्रियान्वन अपने तरीके से शहडोल के आदिवासी विभाग के साथ पारदर्शी भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुके पर्दे के पीछे से सहायक आयुक्त की भूमिका गतिविधियां संभाल रहे अंसारी ने अपने  लिए सर्वोच्च प्राथमिकता में नीतिगत बना दिया। बहाना कोरोना महामारी में किए गए सेवाओं का है अवसर निभाना।

एक लंबी चौड़ी लिस्ट में सबसे ऊपर स्वयं का नाम रखकर गणतंत्र दिवस के अवसर पर मंत्री के हाथों सम्मानित होने का अवसर ढूंढ लिया गया था। भूषण महोबिया और कोषालय अधिकारी साथी को भुल गए लिस्टिंग के लिए।

 जबकि अब यह स्पष्ट हो चुका है क्षेत्र संयोजक अंसारी के ऊपर लोकायुक्त ने 8 करोड़ से ज्यादा के अनियमित भुगतान के लिए नोटिस जारी कर दिया है। जोकि तृतीय वर्ग कर्मचारी द्वारा गैरकानूनी तरीके से उच्च अधिकारी के साथ मिलकर निजी शिक्षण संस्थान को देते हुए बंदरबांट किया जिसकी जांच होना सुनिश्चित है। तो फिर मंत्री के हाथों ऐसे पारदर्शी-भ्रष्टाचारी के लिए कोरोना के बहाने यदि सम्मानित कराना ही था तो विभाग के लेखापाल रहे कौशल सिंह मरावी की कुशलता को क्यों सम्मानित नहीं किया जाना चाहिए था...?। उन्हें तो अभी भी दंडित नहीं किया गया है उन्हें तो सिर्फ भ्रष्टाचार के लिए दंडित करने का नोटिस ही मिला था। जैसे लोकायुक्त ने अंसारी के भ्रष्टाचार कार्य को नोटिस भेजा है । 

तो देखना होगा कि क्या प्रभारी मंत्री के आंख में कोरोना महामारी का धूल झोंक कर गणतंत्र दिवस में तिरंगे के नीचे कितने पारदर्शी-भ्रष्टाचार को सम्मानित किया जाता है अथवा नहीं ....?

बहरहाल अगर ऐसा होता भी है तो यह बड़ी बात नहीं होगी क्योंकि अक्सर तिरंगे के नीचे शिक्षा क्षेत्र के तमाम भ्रष्टाचार के महारथी स्वयं को प्रभारी मंत्री से सम्मानित कराते देखे गए हैं। यह मौका तो तिरंगे के साथ कोरोना का सबसे बड़ा बहाना है। बिना निर्माण कराएं एडवांस राशि निकालें। कार्यरत कर्मचारियों को छोड़कर दूसरे कार्यकारियों के बैंक खातों में राशि जमा कराया गया है बिना आवेदन के स्थानांतरण करना। शासन के द्वारा भेजे गए राशि वापस लेंना उच्च अधिकारियों के द्वारा।

विशेष विभागीय सूत्रों के अनुसार सत्ता के जिला मुखिया का सिर झुका सम्मान के समय ।

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