विंध्य और शहडोल संभाग में स्वास्थ्य क्रांति: आदित्य सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में ‘आयुष्मान भारत’ के तहत कॉर्डियोलॉजी एवं न्यूरोसर्जरी का पूर्णतः निःशुल्क और कैशलेस उपचार प्रारंभ।
संभागीय स्वास्थ्य व्यवस्था के इतिहास में युगांतरकारी अध्याय: दिल के दौरे, ब्रेन स्ट्रोक, पैरालिसिस, रीढ़ की हड्डी और हेड इंजरी का विश्वस्तरीय इलाज अब स्थानीय स्तर पर उपलब्ध।
गरीब और मध्यम वर्ग को महानगरों के अत्यधिक महंगे इलाज, लंबी यात्राओं और कर्ज के भारी बोझ से मिली स्थायी मुक्ति।
गोल्डन ऑवर’ में त्वरित जीवन रक्षा: 24×7 अत्याधुनिक कैथ लैब, मॉड्युलर न्यूरो-ओटी, आईसीयू और सुपरस्पेशलिस्ट डॉक्टरों की टीम संभाग में तैनात।
शहडोल मुख्यालय संभाग और आसपास के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र ग्रामीण अंचलों के स्वास्थ्य परिदृश्य में एक नए और युगांतरकारी युग का सूत्रपात हुआ है। संभाग के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान आदित्य सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, शहडोल ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ (AB-PMJAY) के अंतर्गत अपनी दो सबसे महत्वपूर्ण एवं जीवन रक्षक के लिए सुपरस्पेशलिटी सेवाओं कॉर्डियोलॉजी (हृदय रोग) और न्यूरोसर्जरी (मस्तिष्क एवं रीढ़ की हड्डी के रोग) को पूर्ण रूप से संबद्ध कर शत-प्रतिशत निःशुल्क और कैशलेस उपचार सेवाएं प्रारंभ कर दी हैं।
इस ऐतिहासिक विस्तार के बाद शहडोल संभाग (शहडोल, उमरिया, अनूपपुर) सहित निकटवर्ती जिलों जैसे डिंडौरी, मंडला, सीधी तथा सीमावर्ती छत्तीसगढ़ क्षेत्र के लाखों नागरिकों को अब हार्ट अटैक, एंजियोप्लास्टी, पेसमेकर प्रत्यारोपण, ब्रेन हेमरेज, स्ट्रोक, सिर की गंभीर चोट (ट्रॉमा) और रीढ़ की हड्डी के जटिल ऑपरेशनों के लिए महानगरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। पात्र परिवारों को यह सभी जीवन-रक्षक सेवाएं आधुनिक कैथ लैब, एडवांस्ड न्यूरो मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर और विशेषज्ञ चिकित्सकों के माध्यम से पूर्णतः निःशुल्क मिलेंगी।
1. महानगरों पर निर्भरता और विस्थापन के दौर का अंत।
अब तक शहडोल और विंध्य अंचल में तृतीयक स्तर (Tertiary Care) की कॉर्डियोलॉजी और न्यूरोसर्जरी सुविधाएं न होने के कारण गंभीर रूप से बीमार मरीजों को 300 से 800 किलोमीटर दूर जबलपुर, नागपुर, भोपाल, रायपुर या दिल्ली जैसे बड़े महानगरों में ले जाना परिजनों की विवशता थी।
इस विवशता के दो अत्यंत घातक पहलू सामने आते थे:।
समय का भारी नुकसान: महानगरों तक पहुंचने में 6 से 10 घंटे या उससे भी अधिक का समय लगता था। इस लंबी और कष्टप्रद यात्रा के दौरान रास्ते में ही गंभीर मरीजों की स्थिति बिगड़ जाती थी और अनेक लोग समय पर इलाज न मिलने से दम तोड़ देते थे।
आर्थिक विनाश और भारी कर्ज: महानगरों के निजी अस्पतालों में आईसीयू, एंजियोप्लास्टी और ब्रेन सर्जरी का खर्च 2 लाख से 7 लाख रुपये तक पहुंच जाता था। इस खर्च को वहन करने के लिए आदिवासी, ग्रामीण और निम्न-मध्यमवर्गीय परिवारों को अपनी कृषि भूमि बेचनी पड़ती थी, मवेशी गिरवी रखने पड़ते थे या भारी ब्याज दर पर साहूकारों से कर्ज लेना पड़ता था।
आदित्य सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में आयुष्मान भारत योजनाओं के अंतर्गत इन दोनों विभागों के पूर्ण संचालन से अब स्थानीय स्तर पर ही महानगरों के समकक्ष चिकित्सा सुविधाएं बिना एक भी पैसा खर्च किए उपलब्ध करा दी गई हैं।
2. गोल्डन ऑवर' का महत्व: समय पर स्थानीय चिकित्सा से जीवन रक्षा।
चिकित्सा विज्ञान के अनुसार किसी भी मेडिकल इमरजेंसी विशेषकर हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और एक्सीडेंटल ट्रॉमा के बाद का शुरुआती समय 'गोल्डन ऑवर' (Golden Hour) कहलाता है।
इस समयावधि में सही अस्पताल में सही उपचार मिलना ही जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करता है।
क. एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम और हार्ट अटैक।
समय की महत्ता: जब हृदय की कोरोनरी धमनी में अचानक थक्का (Blood Clot) जमता है, तो दिल की मांसपेशियों को रक्त और ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाता है। दौरा पड़ने के पहले 60 से 90 मिनट के भीतर यदि अवरुद्ध नस को एंजियोप्लास्टी (Primary PCI) द्वारा खोल दिया जाए, तो हृदय की मांसपेशियों को स्थायी नुकसान होने से 90 प्रतिशत तक बचाया जा सकता है।
स्थानीय समाधान: पहले शहडोल से रेफर होने वाले अधिकांश मरीज रास्ते में ही कार्डियोजेनिक शॉक का शिकार हो जाते थे। अब आदित्य सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल की चौबीसों घंटे सक्रिय कैथ लैब में मरीज के आते ही न्यूनतम 'डोर-टू-बैलून टाइम' (Door-to-Balloon Time) में तत्काल प्राथमिक एंजियोप्लास्टी कर नस को खोल दिया जाता है, जिससे मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौटता है।
ख. ब्रेन स्ट्रोक (मस्तिष्क का दौरा / लकवा)।
विंडो पीरियड: इस्केमिक स्ट्रोक में मस्तिष्क की नस में रुकावट आने पर प्रति मिनट लगभग 19 लाख न्यूरॉन्स नष्ट होते हैं। वहीं मरीज के लक्षण दिखने के 3 से 4.5 घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचने पर विशेष 'थ्रोम्बोलाइटिक' दवा (IV Thrombolysis) देकर नस के थक्के को गलाया जा सकता है।
मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी: बड़ी धमनियों में रुकावट की स्थिति में इंटरवेंशनल तकनीकों से कैथ लैब में जाकर थक्का बाहर निकाल लिया जाता है। स्थानीय स्तर पर यह व्यवस्था होने से मरीज को स्थायी लकवा (पक्षाघात) होने से बचाया जा सकता है।
ग. सड़क दुर्घटनाएं, ट्रॉमा एवं गंभीर हेड इंजरी।
शहडोल और आसपास के राष्ट्रीय व राजकीय राजमार्गों तथा पहाड़ी मोड़ों पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में सिर की गंभीर चोटें।
(जैसे Subdural Hematoma, Epidural Hematoma) अत्यधिक आम हैं।
इन मामलों में खोपड़ी के भीतर रक्त का थक्का जमने से इंट्राक्रैनियल दबाव तेजी से बढ़ता है। यदि मरीज को कुछ ही घंटों के भीतर क्रेनियोटॉमी (Craniotomy) सर्जरी न मिले, तो मस्तिष्क का महत्वपूर्ण हिस्सा दब जाता है (ब्रेन हर्निएशन)। स्थानीय स्तर पर न्यूरोसर्जन और न्यूरो-ओटी उपलब्ध होने से अब दुर्घटना पीड़ितों की जान तत्काल बचाई जा सकेगी।
3. कॉर्डियोलॉजी विभाग: उपलब्ध विश्वस्तरीय ढांचा एवं प्रक्रियाएं।
हॉस्पिटल का कॉर्डियोलॉजी विभाग विश्वस्तरीय डायग्नोस्टिक और इंटरवेंशनल तकनीकों से लैस है, जहाँ विशेषज्ञ कॉर्डियोलॉजिस्ट्स की टीम 24 घंटे आपातकालीन सेवाएं प्रदान कर रही है:।
गैर-आक्रामक नैदानिक सुविधाएं Non-Invasive Cardiology।
डिजिटल 12-लीड ईसीजी एवं 24-घंटे होल्टर मॉनिटरिंग: दिल की असामान्य धड़कनों (Arrhythmia) और अचानक बेहोशी के कारणों का सटीक विश्लेषण।
3D/4D कलर डॉपलर इकोकॉर्डियोग्राफी: हृदय के वाल्वों की कार्यप्रणाली, पंपिंग क्षमता (LVEF) और जन्मजात विकृतियों की उच्च-गुणवत्ता वाली त्रि-आयामी इमेजिंग।
ट्रेडमिल टेस्ट (TMT / Stress Test): शारीरिक श्रम के दौरान हृदय की कार्यक्षमता और छुपे हुए ब्लॉकेज की पहचान।
स्ट्रैस इको एवं डोब्यूटामिन स्ट्रैस स्टडीज: उन मरीजों के लिए जो ट्रेडमिल पर दौड़ने में असमर्थ हैं।
इंटरवेंशनल कॉर्डियोलॉजी (Cath Lab Services)
कोरोनरी एंजियोग्राफी (Coronary Angiography): आधुनिक 'रेडियल रूट' (कलाई की नस) के माध्यम से बिना किसी बड़े चीर-फाड़ के, दर्द-रहित और सुरक्षित प्रक्रिया। इसके बाद मरीज कुछ ही घंटों में चलने-फिरने लगता है।
प्राइमरी एवं इलेक्टिव एंजियोप्लास्टी (PTCA): अत्याधुनिक ड्रग-एल्यूटिंग स्टेंट्स (DES) के जरिए दिल की बंद नसों को पूर्ण रूप से खोलना।
जटिल कोरोनरी इंटरवेंशन: क्रोनिक टोटल ऑक्लूजन (CTO), बाइफरकेशन (दोराहे वाले ब्लॉकेज) और कैल्सीफाइड घावों का आधुनिक तकनीकों से सुरक्षित उपचार।
पेसमेकर एवं डिवाइस प्रत्यारोपण: धीमी धड़कन वाले मरीजों के लिए सिंगल चैंबर, डुअल चैंबर पेसमेकर तथा गंभीर मामलों में बिवेंट्रिकुलर पेसमेकर (CRT-D / ICD) का सफल इम्प्लांटेशन।
पेरिफेरल वैस्कुलर इंटरवेंशन: पैर, हाथ और गुर्दों (किडनी) की नसों के ब्लॉकेज की एंजियोप्लास्टी एवं स्टेंटिंग।
4. न्यूरोसर्जरी एवं न्यूरोलॉजी विभाग: जटिल विकृतियों का सूक्ष्म उपचार।
मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी अत्यंत संवेदनशील संरचनाएं हैं।
इनके सटीक और सुरक्षित उपचार के लिए अस्पताल में अत्याधुनिक ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप और समर्पित न्यूरो-आईसीयू स्थापित किया गया है:
क. मस्तिष्क से जुड़ी प्रमुख सर्जरी (Cranial Procedures)
आपातकालीन हेड इंजरी सर्जरी: एक्स्ट्राड्यूरल हेमटोमा (EDH), सबड्यूरल हेमटोमा (SDH), इंट्रासेरेब्रल ब्लीड और डिप्रेस्ड स्कल फ्रैक्चर की तत्काल सर्जरी।
माइक्रोसर्जिकल ब्रेन ट्यूमर रिसेक्शन: ग्लियोमा, मेनिनजिओमा, वेस्टिबुलर श्वानोमा और पिट्यूटरी ट्यूमर को आधुनिक माइक्रोस्कोपिक तकनीक से सुरक्षित निकालना, जिससे मरीज की दृष्टि, आवाज या सोचने-समझने की क्षमता पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े।
वैस्कुलर न्यूरोसर्जरी: मस्तिष्क की कमजोर नसों के उभार (Aneurysm Clipping) और नसों के गुच्छे (AVM) का सर्जिकल प्रबंधन।
हाइड्रोसिफेलस उपचार: मस्तिष्क में अतिरिक्त पानी का दबाव कम करने हेतु वेंट्रिकुलोपेरिटोनियल (VP) शंट सर्जरी और एंडोस्कोपिक प्रक्रियाएं।
ख. स्पाइनल सर्जरी (रीढ़ की हड्डी एवं नसों का उपचार)
माइक्रो-डिस्केक्टॉमी (Microdiscectomy): स्लिप डिस्क और साइटिका के कारण पैरों में होने वाले असहनीय दर्द, झनझनाहट व सुन्नपन का न्यूनतम चीरे (Minimally Invasive) से सटीक समाधान।
स्पाइनल फिक्सेशन एवं फ्यूजन: सड़क दुर्घटनाओं में रीढ़ की हड्डी टूटने, मनके खिसकने (Spondylolisthesis) और स्पाइन टीबी के कारण अस्थिर रीढ़ को टाइटेनियम पेडिकल स्क्रू और रॉड्स के माध्यम से स्थिर करना।
स्पाइनल ट्यूमर सर्जरी: मेरुरज्जु की नसों के अंदर या बाहर मौजूद ट्यूमरों को सुरक्षित रूप से बाहर निकालना।
सर्वाइकल स्पाइन सर्जरी: गर्दन की नसों के दबने पर ACDF (एंटीरियर सर्वाइकल डिस्केक्टॉमी एंड फ्यूजन) तथा डिस्क रिप्लेसमेंट।
आयुष्मान भारत योजना: मिलने वाले लाभों का विवरण।
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को प्रतिवर्ष ₹5,00,000 (पाँच लाख रुपये) तक का निःशुल्क स्वास्थ्य सुरक्षा कवच प्रदान किया जाता है।
आदित्य सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में यह व्यवस्था पूरी तरह कैशलेस (Cashless) और पेपरलेस (Paperless) संचालित है:
भर्ती एवं आईसीयू शुल्क: जनरल वार्ड से लेकर एडवांस्ड क्रिटिकल केयर आईसीयू तक का पूरा खर्च योजना के अंतर्गत शामिल है।
जांच एवं डायग्नोस्टिक्स: उपचार से पूर्व और उपचार के दौरान आवश्यक सभी रक्त जांचें, डिजिटल एक्स-रे, सीटी स्कैन और इकोकार्डियोग्राफी निःशुल्क हैं।
सर्जरी एवं इम्प्लांट्स: ऑपरेशन थियेटर का शुल्क, सर्जिकल टीम की फीस, उच्च गुणवत्ता वाले कोरोनरी स्टेंट्स, पेसमेकर, स्पाइनल स्क्रू और रॉड्स पूर्णतः योजना के तहत कवर हैं।
दवाएं एवं कंज्यूमेबल्स: अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान दी जाने वाली समस्त दवाइयां, ड्रिप्स और सर्जिकल सामग्री पूरी तरह निःशुल्क प्रदान की जाती हैं।
डिस्चार्ज उपरांत दवाएं: मरीज के अस्पताल से छुट्टी के समय निर्धारित दिनों की दवाइयां भी निःशुल्क दी जाती हैं।
6. सामाजिक एवं आर्थिक प्रभाव: क्षेत्रीय विश्लेषण।
शहडोल संभाग का एक बड़ा हिस्सा जनजातीय, ग्रामीण और कृषि पर निर्भर है। यहाँ स्वास्थ्य संकट सीधे तौर पर पारिवारिक आजीविका को नष्ट कर देता था:।
ऋणग्रस्तता का अंत: राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण (NSSO) के आंकड़े बताते हैं कि भारत में गंभीर बीमारियों पर अचानक होने वाला खर्च परिवारों को गरीबी रेखा से नीचे धकेलने का सबसे बड़ा कारण है। एंजियोप्लास्टी या ब्रेन सर्जरी जैसी प्रक्रियाओं का निःशुल्क लाभ मिलने से संभाग के हजारों परिवारों को आर्थिक तबाही से स्थायी सुरक्षा मिलेगी।
अप्रत्यक्ष खर्चों में 100% की बचत: महानगरों में जाने पर मरीज के साथ 2 से 3 परिजनों को भी जाना पड़ता था। यात्रा, लॉज में ठहरने, खान-पान और मजदूरी के नुकसान के रूप में प्रति परिवार 40,000 से 70,000 रुपये का सीधा खर्च अलग से होता था। स्थानीय स्तर पर इलाज मिलने से यह राशि पूरी तरह बचती है।
मानसिक संबल और पारिवारिक निकटता: गंभीर बीमारी के समय मरीज का अपने पारिवारिक परिवेश और परिचित माहौल में रहना उसके मानसिक तनाव को दूर करता है, जिससे रिकवरी तेजी से होती है।
7. प्रवेश प्रक्रिया: आयुष्मान कार्ड से निःशुल्क इलाज कैसे प्राप्त करें?
मरीज या उनके परिजन निम्नलिखित सरल चरणों के माध्यम से अस्पताल में निःशुल्क सुविधाओं का लाभ प्राप्त कर सकते हैं:
पंजीकरण व सत्यापन (24×7 आयुष्मान हेल्पडेस्क):।
अस्पताल के मुख्य द्वार पर स्थित 'आयुष्मान भारत हेल्पडेस्क' पर संपर्क करें।
मरीज का मूल आयुष्मान भारत डिजिटल कार्ड (PMJAY कार्ड) अथवा समग्र आईडी / पात्रता पर्ची और आधार कार्ड प्रस्तुत करें।
प्रशिक्षित 'आयुष्मान मित्र' बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट) अथवा मोबाइल ओटीपी के जरिए पात्रता का तत्काल ऑनलाइन सत्यापन करेंगे।
विशेषज्ञ परामर्श व जांच:।
कॉर्डियोलॉजिस्ट अथवा न्यूरोसर्जन द्वारा मरीज का गहन चिकित्सीय परीक्षण किया जाता है।
आवश्यक जांचें (ईसीजी, इको, सीटी स्कैन आदि) तत्काल पूरी की जाती हैं।
आपातकालीन प्रोटोकॉल:।
यदि मरीज आपातकालीन स्थिति (जैसे एक्यूट हार्ट अटैक या हेड इंजरी) में आता है, तो अस्पताल प्रशासन सरकारी पोर्टल पर औपचारिकताएं समानांतर रूप से चलाते हुए मरीज का जीवन-रक्षक उपचार तत्काल शुरू कर देता है।
प्री-ऑथराइजेशन एवं उपचार:।
बीमारी के अनुसार आयुष्मान पोर्टल (TMS) पर सरकारी स्वीकृति ली जाती है और बिना किसी अग्रिम भुगतान के सर्जरी या उपचार पूर्ण किया जाता है।
कैशलेस डिस्चार्ज:।
स्वस्थ होने पर मरीज को विस्तृत डिस्चार्ज समरी, जांच रिपोर्ट और दवाइयां देकर ससम्मान विदा किया जाता है।
8. अस्पताल प्रबंधन का संदेश एवं जन-अपील।
आदित्य सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. आदित्य द्विवेदी ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर क्षेत्रवासियों को संबोधित करते हुए कहा:
हमारा एकमात्र संकल्प यह है कि विंध्य और शहडोल संभाग का कोई भी नागरिक उचित इलाज के अभाव में, पैसों की तंगी के कारण या महानगरों की भौगोलिक दूरी की वजह से अपनी जान न गंवाए। कॉर्डियोलॉजी और न्यूरोसर्जरी जैसी अति-विशिष्ट, जटिल और महंगी विधाओं को आयुष्मान भारत योजना से जोड़ना हमारे सामाजिक सरोकार और जनसेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
अस्पताल में अंतरराष्ट्रीय मानकों की फ्लैट-पैनल कैथ लैब, अत्याधुनिक मॉड्युलर ऑपरेशन थियेटर, पूर्ण सुसज्जित क्रिटिकल केयर आईसीयू, 24 घंटे समर्पित सुपरस्पेशलिस्ट डॉक्टरों की टीम पूरी तरह तत्पर है।
मैं संभाग के प्रत्येक नागरिक से विनम्र अपील करता हूं कि सीने में दर्द, भारीपन, सांस फूलने, अचानक पसीना आने, हाथ-पैर में कमजोरी, मुंह टेढ़ा होने, बोलने में लड़खड़ाहट अथवा सड़क दुर्घटना में सिर की चोट जैसे लक्षणों को तनिक भी नजरअंदाज न करें। अंधविश्वास या गैर-प्रमाणित इलाज में कीमती समय व्यर्थ किए बिना सीधे अस्पताल पहुंचें और सरकार की इस जनकल्याणकारी योजना के माध्यम से अपने प्रियजनों की जीवन रक्षा सुनिश्चित करें।
जनहित में संपर्क एवं आपातकालीन सहायता।
संस्थान: आदित्य सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, शहडोल (मध्य प्रदेश)
सुविधा: 24 घंटे आपातकालीन ट्रॉमा केयर, कैथ लैब, न्यूरो-आईसीयू एवं एम्बुलेंस सेवा।
विशेष लाभ: आयुष्मान भारत (AB-PMJAY) के अंतर्गत कॉर्डियोलॉजी एवं न्यूरोसर्जरी पूर्णतः निःशुल्क।