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बाबा महाकाल मिनरल का क्षेत्र से हटकर अवैध उत्खनन कारोबार, मैनेजमेंट का काम देख रहे दिव्य प्रकाश।

कलेक्टर के साख पर बट्टा लगा रहे खनिज विभाग अधिकारी।

दर्जनों से ज्यादा शिकायत पर कुंडली मारकर मानसून सत्र का कर रहे इंतजार। 

रेत कम्पनी के अवैध उत्खनन के बने वफादार संबंधित अधिकारी।

प्रशासनिक आदेश के पहले जारी किया गया टी.पी जिम्मेदारों की गजब की है ईमानदारी।

रिपब्लिक न्यूज।।

शहडोल मुख्यालय मुख्यमंत्री प्रमुख सचिव माइनिंग कॉरपोरेशन एनजीटी पीएमओ कमिश्नर कलेक्टर सहित अन्य जगहों पर की गई शिकायत पर जांच की जगह माइनिंग विभाग ने साधी चुप्पी।

मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में कलेक्टर और खनिज विभाग के नापाक गठजोड़ ने भ्रष्टाचार की सारी हदें पार कर दी हैं। 

बिना प्रशासनिक अनुमति के पहले ई-टीपी जारी कर लगभग करोड़ों रुपए के सरकारी खजाने की खुलेआम लूट की गई है।

दर्जनों शिकायतों के बावजूद खनिज महकमा जांच के बजाय मानसून का इंतजार कर रहा है, 

ताकि नदियों के गहरे जख्म और पोकलेन मशीनों के निशान बारिश के पानी से धुल जाएं। अब यह घोटाला वल्लभ भवन से लेकर PMO तक पहुंच चुका है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिले के तेजतर्रार व संवेदनशील कलेक्टर के आदेशों को रद्दी की टोकरी में क्यों फेंका जा रहा है?

जिले की जीवनदायिनी सोन और जोहिला नदियों का सीना भारी मशीनों से बेदर्दी से छलनी किया जा रहा है। स्वीकृत लीज क्षेत्र से दो-तीन किलोमीटर बाहर जाकर अवैध उत्खनन का खुला कारोबार चल रहा है, लेकिन खनिज विभाग ने जानबूझकर अपनी आंखों पर पट्टी बांध रखी है। अधिकारी 'वेट एंड वॉच' की नीति अपनाकर मानसून का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं ताकि बढ़ते जलस्तर में साक्ष्यों की जलसमाधि हो जाए। 

यह सिर्फ विभागीय लापरवाही नहीं बल्कि रेत ठेकेदार को बचाने की एक सोची-समझी साजिश है, 

जहां रक्षक ही पूरी तरह से भक्षक बन चुके हैं और नदियों के अस्तित्व को गहरे संकट में डाल दिया गया है।

कलेक्टर की कार्य प्रणाली पर लग रहा दाग।

जिले में 'संवेदनशील' और त्वरित कार्रवाई करने वाले अधिकारी के रूप में अपनी एक मिसाल पेश करने वाले जिला कलेक्टर की साख पर खनिज विभाग के अधिकारी सीधा बट्टा लगा रहे हैं।

कलेक्टर के सख्त आदेशों के बावजूद खनिज महकमा रेत ठेकेदार  को खुला संरक्षण देकर उन्हें उपकृत कर रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि इन भ्रष्ट अधिकारियों के लिए कलेक्टर के आदेश की अब कोई कीमत नहीं रह गई है।

संबंधित अधिकारियों की माफिया परस्ती के कारण एक संवेदनसील कलेक्टर की छवि भी धूमिल हो रही है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।

पोर्टल का खेल पीएम और सीएम से भी बड़े हुए संबंधित विभाग के जिम्मेदार अफसर।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड MPPCB की अनुमति मिलने से पहले खनिज विभाग का पोर्टल ई-टीपी उगलने लगता है। आखिर यह कौन सा जादुई सिस्टम है जो बिना अनुमति के ही काम करने लगता है? मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव, एनजीटी, कमिश्नर से लेकर पीएमओ तक शिकायतें की गईं, लेकिन जिले के इन बेलगाम अधिकारियों ने मानों सबको ठेंगा दिखा दिया है। 

सभी पुख्ता शिकायतों को कूड़ेदान में फेंककर संबंधित अधिकारी बाबा महाकाल मिनरल रेत कंपनी के साथ वफादारी निभा रहे हैं, 

जैसे ये सूबे के मुखिया और देश के प्रधानमंत्री से भी ऊपर हो गए हों।

अंधेर नगरी चौपट प्रशासन का असली चेहरा सरकार को करोड़ों रुपए राजस्व का चूना। 

पूरे साल संबंधित अधिकारियों और रेत कम्पनी के कर्मचारियों के मिलीं भगत से करोड़ों रुपए का राजस्व घोटाले की जांच की जगह शिकायत को कूड़ेदान में फेंकने का कार्य किया गया है। जांच हेतु शिकायत खनिज निरीक्षक के समझ से पहुंचकर चेंबर में धूल खा रहा है हालांकि यह कोई नई बात नहीं है धूल क्यों न खाए वर्षों से अनूपपुर जिले में खनिज निरीक्षक के पद में पदस्थ रहने का गजब का अनुभव है उनके क्षेत्र में अवैध खनन होना मामूली बात हो चुकी है तो शिकायत पर जांच की उम्मीद कैसे किया जा सकता है जो 'अंधेर नगरी चौपट राजा' कहावत को चरितार्थ करता है। ओवर लोड क्यूबिक मीटर क्षमता से अधिक वाले डंपर को 29 क्यूबिक मीटर का पास जारी कर ओवरलोडिंग को 'सरकारी कवच' पहनाया जा रहा है। सरकार के हिस्से की रॉयल्टी सीधे कम्पनी में कार्यरत कर्मचारियों और रसूखदारों की तिजोरियों में जा रही है, और न्याय की उम्मीद करने वाली जनता इस तमाशे को बेबस होकर देख रही है।

खनिज अधिकारी से लेकर जिलाधिकारी तक दर्जनों शिकायत दर्ज।

रेत कम्पनी के गुर्गों सहित दर्जन भर शिकायतों पर कुंडली मारकर बैठे सिस्टम के खिलाफ अब शिकायतकर्ता ने साक्ष्यों के साथ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की पूरी तैयारी कर ली है।

जब स्थानीय प्रशासन और खनिज विभाग ने धृतराष्ट्र बनकर आंखें मूंद ली हैं, तो अब न्याय की आखिरी किरण सिर्फ न्यायालय ही है। यदि कलेक्टर महोदय ने अपनी साख बचाने के लिए इस नापाक गठजोड़ पर जल्द अपना हथौड़ा नहीं चलाया, तो हाईकोर्ट के डंडे से इस करोड़ों के रेत घोटाले में शामिल सफेदपोशों अधिकारियों और माफियाओं के चेहरे बुरी तरह बेनकाब होना तय है।

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