शहडोल अधिकारियों के भ्रष्टाचार आडिंयो रिकॉर्डिंग ने खोली पोल जिले के कार्यालयों में पदस्थ अधिकारी।
भ्रष्टाचार अधिकारियों के मिलीभगत से संस्थाओं और विभागों के कार्यालयों में अधिकारी पद के लालच और चपलता के लिए भ्रष्टाचारियों का दिन प्रतिदिन जिले में संख्या बढ़ता जा रहा है।
अधिकारियों के सह पर खुलेआम तो नहीं किया जा रहा है। भ्रष्टाचार कई प्रकार से लेन देन का चल रहा खुलेआम मूल भाव का बाजार । पूर्व में एक मामला जनपद विकास खंड जयसिंह नगर के बीआरसी के बाद अब बुढार के एक विकास खंड अधिकारी का ऑडियो आया सामने जिसमें साफ-साफ बोला जा रहा है आओ अधीक्षक पद का आदेश देता हूं। कुछ व्यवस्था के साथ कार्यालय आना और जल्दी आना ।
जबकि आदेश पत्र कई दिन पूर्व से जिले के दो वरिष्ठ अधिकारियों को न्यायालय कोर्ट के द्वारा आदेश भेजा गया था । लेकिन फिर भी बालक छात्रावास अधीक्षक को आदेश प्राप्त नहीं हुआ। किस के सह पर अधिकारियों का बढ़ा है इतना मनोबल कोई भी काम के लिए बिना व्यवस्था के आदेश नहीं होता।
न्यायपालिका के आदेशों का अवहेलना कर लगभग एक माह पंद्रह दिन पूर्व तक आदेश पत्र दबाया गया संबंधित अधिकारियों के कार्यालयों पर इस तरह अधिकारी कानून व्यवस्था के नियम कानूनों निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हैं ।
जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के सह पर तो नहीं किया जाता है ऐसा कारनामा ॽ़
वर्तमान कमिश्नर ने लगाई थी रोक नहीं दिया जाए पूर्व अधीक्षक को पुनः प्रभार।
लेकिन पद के लालच उच्च न्यायालय का रास्ता दिखा दिया और अधीक्षक महोदय पहुंच गया उच्च न्यायालय। कोर्ट ने आदेश जारी कर जिला प्रशासन अधिकारी को निर्देश देते हुए आदेश पत्र कलेक्टर कार्यालय और जिला सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग कार्यालय शहडोल में भेज कर तलब किया और शिक्षक कार्य के साथ ही छात्रावास अधीक्षक का प्रभार दिया जाए।
अगर ऐसा हो रहा है तो फिर कौन करेगा जांच
जबकि आदेश पत्र कई दिन पूर्व से जिले के दो वरिष्ठ अधिकारियों को न्यायालय के द्वारा आदेश भेजा गया था । लेकिन फिर भी बालक छात्रावास अधीक्षक को संबंधित विभाग कार्यालय के अधिकारी द्वारा आदेश पत्र प्राप्त नहीं हुआ। जबकि देश का प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय का आदेश पत्र भी कोई मायने नहीं रखता है अधिकारियों के लिए।
फिर किस के सह पर अधिकारियों का बढ़ा होता है इतना मनोबल कोई भी काम के लिए बिना व्यवस्था के आदेश नहीं होता है। और न्यायालय के आदेश होने पर भी रोक कर रखा जा सकता है। महीनों पहले उच्च न्यायालय ने अधीक्षक को आदेश पत्र जारी कर दिया था पुनः प्रभार।
आदेश होने पर भी पूर्व छात्रावास अधीक्षक को प्रभार नहीं सौंपा गया था।
न्यायपालिका के आदेशों का अवहेलना कर अधिकारी कानून व्यवस्था के नियम कानूनों निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हैं । जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के सह पर तो नहीं किया जाता है ऐसा कारनामा ॽ़
उच्च न्यायालय में झूठा एफिडेविट दिए विकास खंड शिक्षा अधिकारी और व्यवस्था योजना पूर्ण होते ही छात्रावास पहुंच कर पूर्व अधीक्षक को दिलवाए प्रभार विकासखंड शिक्षा अधिकारी।