मुख्यालय शहडोल अंतर्गत विकासखंड जयसिंह नगर से नियम विरुद्ध स्थानांतरण बुढार विकासखंड में कैसे किया गया । फर्जी जाति प्रमाण पत्र का साथ हो तो क्या बात हो। वह भी ओ बी सी से एसटी एससी अनुसूचित जनजाति का फर्जी जाति प्रमाण बनवाओ और पारस मणि कि तरह ही चमकते रहो । विद्यालय के कर्मचारी उपस्थिति पंजी रजिस्टर में नाम दर्ज करो और मीटिंग या किसी और भी कार्य के बहाने से ऑफिस में आकर कुर्सी तोड़ते हुए गप सोटो । क्योंकि यहां अंधेर नगरी और चौपट राजा के हैं अधिकारी । जिले के बहुमूल्य आदिवासी क्षेत्र जयसिंह नगर विकास खंड के शासकीय माध्यमिक विद्यालय खडगडी से प्रमोद बुढार विकासखंड क्षेत्र में नियम विरुद्ध स्थानांतरण करवा कर पदस्थ हैं । किस नियम के तहत हुआ स्थानांतरण क्या स्थानांतरण करने वाले अधिकारी शासन के द्वारा स्थानांतरण नियम प्रणाली बता सकते हैं । किस नियम से किया गया है स्थानांतरण जिले के जयसिंह नगर विकासखंड से बुढार विकासखंड के क्षेत्र पर अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर शासकीय राशि गवन के खेल में शामिल है संबंधित विभाग अधिकारी। इसलिए किसी भी कार्य के स्वीकृति राशि पर संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों ने अपने इशारे पर सब को नचाते हैं । और जो आदेश शासन के द्वारा होता है उस आदेश को दरकिनार करते हुए अपने आदेश से चलाते हैं विद्यालय छात्रावास और वहां पर पदस्थ शासकीय कर्मचारियों को वेतन राशि तो शासन का लेते हैं लेकिन कर्मचारी अधिकारियों के होते हैं । फर्जी जाति प्रमाण पत्र का लाभ मिला इसलिए पारस मणि की तरह चमकते हुए विद्यालय संभाग के टॉप वन डीएवी पब्लिक विद्यालय में अध्ययनरत हैं दोनों छात्र। शासन से कोटा प्राप्त संख्या पर अपने ही बच्चों को फर्जी जाति प्रमाण पत्र के शिक्षक अपने दोनों बच्चों को डीएवी जैसे विद्यालयों में अध्ययनरत करवा रहे हैं। क्या शासकीय शिक्षक होते हुए अनुसूचित जनजाति का लाभ शासन के योजनाओं का अपने ही बच्चों को दिला सकते हैं । और जो उसके लिए पात्रता रखते हैं वह शासकीय विद्यालय में अध्ययनरत हैं।