मुख्यालय शहडोल जनपद पंचायत जयसिंह नगर अंतर्गत ग्राम पंचायत जमुनिया सचिव शशिकांत शुक्ला ने 15वें वित्त की राशि से खेली होली बिना निर्माण कार्य के निकाली स्वीकृत एडवांस राशि। सचिव शशिकांत शुक्ला और अधिकारियों की मिलीभगत से चार निर्माण कार्यों की स्वीकृत राशि लगभग 1 लाख रुपए एडवांस में निकाली गई ग्राम पंचायत जमुनिया में15वें वित्त की राशि से होने वाले निर्माण के स्थानों पर आज तक नहीं उपलब्ध हो सका निर्माण सामग्री। जनपद पंचायत जयसिंह नगर से लगे नजदीकी ग्राम पंचायत जमुनिया जोकि अपनी व्यथा स्वयं सुना रहा है। शासन ने आदिवासी बहुमूल्य क्षेत्रों के विकास के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर पानी की तरह बहा रहे हैं जिससे आदिवासी गरीबों के लोगों को बेहतर से बेहतर सुविधा उपलब्ध हो सके ताकि आदिवासी वर्ग के लोगों को अच्छी सुविधा मुहैया हो सके इसी कड़ी के तहत शासन से अलग बजट ही राशि आवंटित करता है जिससे सीधा ग्राम पंचायत आदिवासी क्षेत्रों का कल्याण कर सकें जिसके स्वरूप 15 वित्त में कहा जाता है 15 वित्त राशि टाइट अंटाइट कार्य से ग्राम पंचायत में जरूरी निर्माण कार्य एवं जन हितेषी कार्य हो सके लेकिन शासन के द्वारा सोचे कार्यो में ग्राम पंचायत पानी फेरता नजर आ रहा है । इसी का एक उदाहरण जनपद पंचायत जयसिंह नगर अंतर्गत ग्राम पंचायत जमुनिया में देखा जा सकता है सचिव शशिकांत शुक्ला और उपयंत्री रामचंद्र कुशवाहा पूर्व सरपंच के मिलीभगत से सचिव ग्राम पंचायत जमुनिया शशिकांत शुक्ला ने ऐसा नटवरलाल कारनामा कर दिखाया जो दूसरे फिराक के सचिव के लिए प्रेरणा स्तंभ बन गया सचिव शशिकांत ने जैसे ही जाना ग्राम पंचायत ठेगरहा का प्रभार खाली है फौरन अपने दलबल को लगाकर ठेगरहा ग्राम पंचायत का अतिरिक्त प्रभार हथिया लिया और पदभार ग्रहण करते ही पंचायत की राशि में डाका डालने के लिए आनन-फानन में दो जगह चौपड़ निर्माण कार्य के लिए राशि 5-5 लाख रुपए की लागत से 15वे वित्त के राशि से तकनीकी स्वीकृत ग्राम पंचायत में ले लिया गया और जैसे ही तकनीकी स्वीकृत मिलते ही फौरन प्रशासनिक स्वीकृति कर सारे नियमों को दरकिनार करते हुए काम के नाम से ₹ लाखों की राशि बिना निर्माण कराएं एडवांस रूप से निकाले गऐ। मामला यहीं नहीं रुकता दूसरे ग्राम पंचायत जमुनिया में भी सचिव शशिकांत अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कार्य स्थलों में 8 लाख की लागत से किशोरी के घर से सीता के घर तक नाली निर्माण के नाम पर तकनीकी स्वीकृति के साथ ही ₹लाखों हजार की राशि बिना किसी अनुमति से एडवांस रूप से निर्माण कार्य के नाम कर निकाला गया जबकि देखा जाए तो किशोरी के घर से सीता के घर तक नाली निर्माण होने का सवाल ही नहीं उठता है जबकि इस स्थल पर ना ही पानी रुकता है ना ही किसी प्रकार का आवा गमन अवरुद्ध होता है । जब सचिव शशिकांत शुक्ला ने शासन के राशि को हड़पने के लिए योजना ही बना लिया हो संबंधित अधिकारी के साथ ग्रामीण उपयंत्री रामचंद्र कुशवाहा के अनदेखी पर नाली का निर्माण हो गया शुरू आधे से अधिक नाली वन कर तैयार हो गया कहीं भी राड़ के नाम पर एक टूकडा नहीं लगाई गई। जब शासन के द्वारा नियुक्त अधिकारी ग्रामीण उपयंत्री रामचंद्र शुक्ला जी उस क्षेत्र के मसीहा हो तो उसको कौन रोक सकता है सचिव शशिकांत एक पुलिया निर्माण के नाम पर राशि निकाली जो मोहन सिंह के खेत के पास तकनीकी स्वीकृति करा कर ₹2 लाख कुछ हजार उस पुलिया निर्माण के नाम से निकाले जबकि आज दिनांक तक उस स्थल पर निर्माण के नाम पर सिर्फ गड्ढा ही खोदा गया है। निर्माण स्थल अपनी अपनी व्यथा दिखा रहा है । निर्माण स्थल पर किसी प्रकार की कोई भी सामग्री नहीं रखा है ना ही वह स्थल निर्माण के लिए उपयुक्त है लेकिन बात सचिव शशिकांत शुक्ला और उपयंत्री रामचंद्र कुशवाहा जी का हो तो ग्रामपंचायत के किसी भी क्षेत्र पर कुछ भी निर्माण किया जा सकता है । जब एक माह बाद भी निकाले गए राशि पर काम नहीं किया गया यह जानकारी ग्रामीण लोगों में चर्चा होने लगा तब आनन-फानन में उपयंत्री और सचिव ने प्रशासनिक कार्यवाही के डर से बचने के लिए नाली का काम ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्य शुरू किया लेकिन ठेकेदार नियम विरुद्ध बिना मापदंडों के निर्माण कार्य शुरू कर दिया जहां वर्तमान सचिव शशिकांत शुक्ला और उपयंत्री रामचंद्र कुशवाहा के द्वारा 15 वित्त की राशि को ठेकेदार के साथ मिलकर फर्जी तरीके से कार्यों को भ्रष्टाचार का खेल शुरू कर दी गई हैं। इस बात का गवाह है । जब आचार संहिता लगने वाला था तभी अधिकारी और उपयंत्री सचिव की मिलीभगत से बिना निर्माण के राशि निकाली गई। इस बात पर उपयंत्री रामचंद्र कुशवाहा ने साधी चुप्पी
नाली निर्माण स्थल