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पुलिस प्रशासन ने चस्पा किया नोटिस थाना में उपस्थित हो नहीं हुए तो टूटेगा आशियाने किस बीमारी का इलाज कराने पहुंचे मेडिकल कॉलेज छात्रावास परिसर इलाज नहीं होने से मचाया तांडव।

 रईसजादों का मेडिकल कॉलेज परिसर में तांडव,  आमिर बाप के बिगड़े औलादों ने किया तोड़फोड़ और मारपीट जानकारी मिलते ही डीएसपी ने संभाला मोर्चा।

मेडिकल कॉलेज डीन मिलिंद को पुलिस और पत्रकारों से है सख्त नफरत। क्या यही नफ़रत  खौफ और किस बीमारी का देर शाम इलाज ढूंढते रईसजादों की फौज पहुंची मेडिकल कॉलेज फैकल्टी स्टूडेंट्स हॉस्टल परिसर ।


रिपब्लिक न्यूज।

शहडोल // मेडिकल कॉलेज परिसर में रविवार देर शाम हुआ जोरदार हंगामा। मेडिकल कॉलेज के छात्रों एवं सुरक्षा कर्मियों के साथ सोहागपुर निवासी नावेद नामक युवक ने की जमकर मारपीट और तोड़फोड़ किए जाने का मामला सामने आया है। घटना रविवार देर शाम 8:  और 9:00 बजे के दरमियान की बताई जा रही है और इसका एक विडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है देर रात चले हंगामे की सूचना स्थानीय थाना पुलिस को मिलते ही मौके पर पहुंची पीसीआर ने उपद्रवियों को देखते हुए आला अधिकारियों से बात कर अतिरिक्त पुलिस बल की मांग की। जिसके बाद पुलिस ने मेडिकल कॉलेज का मेंन गेट बंद कराते हुए मामले की जांच शुरू की। जिसके बाद दो पक्षों का विवाद में घी डालने पहुंचे लगभग 200 लोगों की भीड़। यह ज़िद बदला प्रतिशोध लेने की स्पष्ट दिखाई पड़ी। इस झड़प में किसी का सर फटा तो किसी की कार में तोड़फोड़ हुई। हालांकि इस मामले में निष्पक्ष जांच हुई तो बताना मुश्किल होगा कि देर रात बस संचालकों के पुत्र समेत आधा दर्जन लोगों को मेडिकल कॉलेज फैकल्टी एवं स्टूडेंट्स हॉस्टल रेसीडेंट जाने की क्या आवश्यकता पड़ी थी वो कौन सी लाईलाज बीमारी थी जिसका इलाज ओपीडी में नहीं था और इसके खातिर बस संचालक के शहजादे घर के चिराग साइलेंट जोन क्षेत्र मेडिकल कॉलेज फैकल्टी एवं स्टूडेंट्स हॉस्टल में तेज़ आवाज़ में संगीत के साथ धूम धड़ाका करते हुए गाली गलौज बदतमीजी और मारपीट पर उतारू हो गए।

 जन चर्चा तो पैसे की गर्मी का बताया जा रहा है और हो भी क्यों । 

लेकिन शहडोल मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों के अलावा फैकल्टी लेक्चरर सहित मेडिकल कॉलेज डीन को देर रात हुए हंगामे के पीछे का सच जानना जरूरी भी है बात यहां तक पहुंची कैसे इस पर मंथन किया जाना चाहिए ताकि रविवार हुई घटनाक्रम की फिर से पुनरावृत्ति न हो। इस तरह की घटना के बीच यद्यपि कोई मरीज मेडिकल कॉलेज क्रिटिकल कंडीशन में इलाज को पहुंचता तो डॉक्टर तो युद्ध अभ्यास करने कराने और इससे बचने और फंसाने में व्यस्त थे जाहिर सी बात है मरीज़ की जान आफ़त में आ जाती। मेडिकल कॉलेज शिक्षा का वो मंदिर है जहां मरीजों की जान कैसे बचाना है सिखाया जाता है तो बेहतर होगा। आदिवासी अंचल में बेबसों निर्धन आदिवासियों को सूबे के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का समर्पित बिरसा मुंडा मेडिकल कॉलेज में गुंडागर्दी को मिलिंद शिरोलकर द्वारा बढ़ावा देने की बात भी सामने आ रही है इसकी पुष्टि को कई उदाहरण भी है ।

घटनाक्रम के दौरान पुलिस और पत्रकारों से मुझे नफ़रत है डीन मिलिंद शिरोलकर द्वारा कहा गया। जबकि पुलिस और पत्रकारों से चोर, बदमाश, डकैत और भ्रष्टाचारी ही डरते हैं डीन मिलिंद शिरोलकर का बयान के मायने मीडिया और पुलिस को तलाशने होंगे।

बहरहाल रविवार की घटना शर्मनाक है इंजेक्शन और कर्टन वाले हाथों में लट्ठ पकड़ाया गया तोड़फोड़ करवाई गई और प्रशासन जेब में है बताने से बेहतर होता सीसीटीवी लैंस परिसर खंगालते हुए पुलिस प्रशासन की मदद लेनी चाहिए थी। वहीं शहर के नगर सेठ नफीस बस सर्विस के संचालक की हद से ज्यादा दी छूट के चलते ही जिसे बिगड़ा नवाब भी कह सकते हैं उस पुत्र की बीमारी का ईलाज जो केवल मेडिकल कॉलेज फैकल्टी एवं स्टूडेंट्स हॉस्टल के आसपास मिलता है मेडिकल कॉलेज अस्पताल की ओपीडी में नहीं मिला इस बात पर आत्म मंथन और चिंतन की आवश्यकता है।

इस घटनाक्रम की जानकारी लगते ही उप पुलिस अधीक्षक राघवेन्द्र द्विवेदी मौके पर पहुंचकर मेडिकल कॉलेज में हुई घटना का जायजा लिया, कहा यह भी जा रहा है कि उप पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में मेडिकल कॉलेज में बढ़ता विवाद पूरी तरह से कंट्रोल में आ गया। मारपीट और तोड़फोड़ में जनहानि की संभावना जताई जा रही है।

जानकारी अनुसार यह  कि मामले में दो अलग अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं जिसमें पहला मेडिकल कॉलेज सुरक्षागार्ड की शिकायत पर नावेद एवं अन्य चार लोगों पर धारा 279, 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

और दूसरा यह कि मेडिकल कॉलेज फैकल्टी के स्टाफ से शिकायतकर्ता के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है। जिसमें नावेद खान, संस्कार बजाज, पप्पू अहमद, नफीस खान तौहिद खान, नौशाद खान, युसूफ का भतीजा बड़ी मूछों वाला नफीस बस का कन्डेक्टर पर धारा 147, 148, 149, 294, 323, 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

इस विवाद की तह तक की रिपोर्टिंग में पढ़े अगला अंक कौन सी दवाई है मेडिकल कॉलेज परिसर में क्या नाम है उस दवाई का जो रहीस जादे को करता है ठीक।

विशेष सूत्रों अनुसार अमन की शीतल छांव पर विश्राम कर रहे हैं मेडिकल कॉलेज के उपद्रवी चीनी चीनी भाई भाई का वफादारी निभा रहे जमात के नुमाइंदे।

वहीं एक और बात जो दबी जुबान बोली जा रही है अगर...मैं चाह लूं तो मेडिकल कॉलेज ही नहीं रहेगा यहां शहडोल में । 

विशेष सूत्र अपने आप को पत्रकारिता की श्रेणी में लाने के लिए सहायक जमात के व्यक्ति ने की मैनेजमेंट।

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